Meaning of

ज़बां

zabaan • زباں

भाषा; जीभ; वाणी

language; tongue; speech

زبان; زبان; گفتار

Persian

अगर है इश्क़ सच्चा तो निगाहों से बयाँ होगा ज़बाँ से बोलना भी क्या कोई इज़हार होता है — Bhaskar Shukla
सब इंतिज़ार में थे कब कोई ज़बान खुले फिर उस के होंठ खुले और सबके कान खुले — Umair Najmi
तेरी रंजिश खुली तर्ज-ए-बयाँ से न थी दिल में तो क्यूँँ निकली ज़बाँ से — Dagh Dehlvi
सगी बहनों का जो रिश्ता रिश्ता है उर्दू और हिन्दी में कहीं दुनिया की दो ज़िंदा ज़बानों में नहीं मिलता — Munawwar Rana
उस साँवले से जिस्म को देखा ही था कि बस घुलने लगे ज़बाँ पे मज़े चाकलेट के — Shahid Kabir
है नाज़ मुझ को अपनी हिंदी ज़बाँ पे यारो हिंदी हैं हम वतन हैं ये देश सब सेे आला — Dr Mohsin Khan
वो जो ख़्वाब थे मेरे ज़ेहन में न मैं कह सका न मैं लिख सका कि ज़बाँ मिली तो कटी हुई जो क़लम मिला तो बिका हुआ — Iqbal Ashhar
जो है ज़बाँ पे दिल को नहीं उस सेे फ़ाएदा जो दिल में है वो ला नहीं सकते ज़बान पर — Akbar Allahabadi
क्या ख़ूब तुम ने ग़ैर को बोसा नहीं दिया बस चुप रहो हमारे भी मुँह में ज़बान है — Mirza Ghalib

'ज़बां' अपने मूल में अभिव्यक्ति के माध्यम को संदर्भित करता है, विचारों और भावनाओं का वाहन। कविता में, यह संचार का प्रतीक बन जाता है, दिलों और दिमागों के बीच की खाई को पाटता है। यह संस्कृति, पहचान और मानव अनुभव की अनकही बारीकियों का भार वहन करता है।

कवि 'ज़बां' का उपयोग संचार और गलतफहमी के विषयों का पता लगाने के लिए करते हैं। यह शब्दों की शक्ति को चंगा करने या नुकसान पहुंचाने का प्रतीक हो सकता है। यह भाषा के नुकसान और उसके बाद की चुप्पी पर भी विचार कर सकता है, जो एक लालसा या उदासीनता की भावना उत्पन्न करता है।

'ज़बां' आत्माओं के बीच मौन पुल है, शब्दों की शक्ति और नाजुकता का प्रमाण है।