Meaning of

ज़री

zari • زری

सोने की कढ़ाई; ब्रोकेड

gold embroidery; brocade

سونے کی کڑھائی; بروکیڈ

Persian

मीर के बा'द ग़ालिब ओ इक़बाल
इक सदा, इक सदी में गुज़री है

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उम्र गुज़री है माँजते ख़ुद को
साफ़ हैं पर चमक नहीं पाए

डाल ने फूल की तरह पाला
ख़ार थे ना महक नहीं पाए

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उम्र गुज़री उस का चेहरा देखते
और जी लेते तो दुनिया देखते

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आज की रात भी गुज़री है मिरी कल की तरह
हाथ आए न सितारे तिरे आँचल की तरह

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अब तो हर हाथ का पत्थर हमें पहचानता है
उम्र गुज़री है तेरे शहर में आते जाते

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कभी कभी तो ये वहशत भी हम पे गुज़री है
कि दिल के साथ ही देखा है डूबना शब का

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वो बात सारे फ़साने में जिस का ज़िक्र न था
वो बात उन को बहुत ना-गवार गुज़री है

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ज़िंदगी अपनी जब इस शक्ल से गुज़री 'ग़ालिब'
हम भी क्या याद करेंगे कि ख़ुदा रखते थे

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न गुल खिले हैं, न उन से मिले, न मय पी है
अजीब रंग में अब के बहार गुज़री है

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मिरी ज़िंदगी तो गुज़री तिरे हिज्र के सहारे
मिरी मौत को भी प्यारे कोई चाहिए बहाना

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मीर के बा'द ग़ालिब ओ इक़बाल
इक सदा, इक सदी में गुज़री है

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उम्र गुज़री है माँजते ख़ुद को
साफ़ हैं पर चमक नहीं पाए

डाल ने फूल की तरह पाला
ख़ार थे ना महक नहीं पाए

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ज़री राजसी वस्त्रों की भव्यता और वैभव को दर्शाती है, जहाँ सोने के धागों की चमक शान और सुंदरता की कहानियाँ बुनती है। कविता में, यह केवल भौतिक संपत्ति नहीं बल्कि आत्मा की समृद्धि और जीवन के जटिल सौंदर्य का प्रतीक है।

कवि अक्सर ज़री का उपयोग प्रिय के वस्त्रों की समृद्धि, किसी स्थान की भव्यता, या प्रकृति की जटिल सुंदरता का वर्णन करने के लिए करते हैं। यह सादगी के विपरीत, जटिलता और विस्तार के आकर्षण को उजागर करता है।

ज़री जीवन की जटिल सुंदरता का प्रतीक बनकर कविता में बुनती है, भौतिक और आध्यात्मिक को एक साथ जोड़ती है।