aaj ki raat bhi guzri hai meri kal ki tarah | आज की रात भी गुज़री है मिरी कल की तरह

  - Ameer Qazalbash

आज की रात भी गुज़री है मिरी कल की तरह
हाथ आए न सितारे तिरे आँचल की तरह

  - Ameer Qazalbash

Neend Shayari

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    थोड़ी सी नादानी दे

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    इन पौदों को पानी दे

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    किनारे पे गुम-सुम महिवाल है

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