ख़्वाब पलकों की हथेली पे चुने रहते हैं कौन जाने वो कभी नींद चुराने आएमुझ पे उतरे मेरे अल्हाम की बारिश बन करमुझ को इक बूॅंद समुंदर में छुपाने आए— Khalil Ur Rehman Qamar