Meaning of

ज़र्ब

zarb • ضرب

प्रहार; आघात; प्रभाव

strike; blow; impact; influence

ضرب; اثر

Arabic

शब-ए-ज़र्बत ये इब्न-ए-शाने हैदर
शब-ए-आशूर से कमतर नहीं हैं

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तुझे ही क्यूँ नज़र आता नहीं मुझ आम सा लड़का
तेरे जब पास होता है तो कितना ख़ास होता है

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बहुत ही ख़ास होते हैं मुहब्बत में
जिन्हें भी यार का दीदार मिलता है

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कुछ लोग ज़माने में हम नाम निकल आए
जो ख़ास सभी से थे वो 'आम निकल आए

है सब सेे जुदा तेरा अंदाज़ तबस्सुम का
जो एक हँसी में दो गुलफ़ाम निकल आए

जो सब को सिखाते थे इकराम मुहब्बत का
उन पर ही मुहब्बत के इल्ज़ाम निकल आए

जो सब को बताते थे मैं अजनबी हूँ कोई
वो नाम से मेरे ही बदनाम निकल आए

तू अहल-ए-ज़मीं से सुन हर बात बना के रख
कुछ भी न पता किस सेे क्या काम निकल आए

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लगाना ज़र्ब जब दिल पर तो ज़ालिम याद ये रखना
इसी दिल में तुम्हारी ज़ात की तौक़ीर होती है

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पहले ख़ास तो आम तो फिर बदनाम हुए
साँसें चलती हैं हम कब के तमाम हुए

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ख़ास हो कर भी मिरा है आम रहना
ज़िंदगी गुमनाम फिर भी नाम रहना

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अब कौन जानता है सुख़न-साज़ की सनक
कब ज़र्ब की हवस में तमाशा बिखेर दे

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मुझे कुछ भी नहीं समझा उन्होंने
जिन्हें मैं ख़ास अपना मानता था

मुझे धोखा दिया आँखों ने मेरी
नहीं ये लोग जिस को जानता था

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शब-ए-ज़र्बत ये इब्न-ए-शाने हैदर
शब-ए-आशूर से कमतर नहीं हैं

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तुझे ही क्यूँ नज़र आता नहीं मुझ आम सा लड़का
तेरे जब पास होता है तो कितना ख़ास होता है

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मूल रूप से 'ज़र्ब' का अर्थ है शारीरिक प्रहार या आघात, एक ऐसा प्रभाव जो निशान छोड़ता है। कविता में, यह रूपक के रूप में विस्तारित होता है, यह दर्शाता है कि कोई व्यक्ति दूसरे के दिल या दिमाग पर गहरी छाप छोड़ता है।

कवि अक्सर 'ज़र्ब' का उपयोग शब्दों या कार्यों के भावनात्मक प्रभाव को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह प्रेम या दर्द की स्थायी छाप का प्रतीक हो सकता है। यह शब्द कोमल शब्दों के विपरीत, तीव्रता को उजागर करता है।

'ज़र्ब' प्रभाव की भावना को पकड़ता है, शारीरिक और भावनात्मक दोनों। यह हमें गहरे अनुभवों द्वारा छोड़े गए निशानों की याद दिलाता है।