Meaning of

ज़वाल

zawaal • زوال

पतन; अवनति

decline; downfall

زوال; گراوٹ

Arabic

आया ही नहीं है इस का तो मुझे ख़याल तक
रूह को बचा के रखना है मुझे ज़वाल तक

झूठ बोलने पे हम से तो सवाल भी हुआ
उस ने क़त्ल भी किया हुआ नहीं बवाल तक

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ऐसे हालात से मजबूर बशर देखे हैं
अस्ल क्या सूद में बिकते हुए घर देखे हैं

हम ने देखा है वज़ादार घरानों का जवाल
हम ने सड़कों पे कई शाह ज़फ़र देखे है

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इस दिल का आख़िरी है बस वो ख़याल हो तुम
हल हो न पाया जो मुझ सेे वो सवाल हो तुम

जाने के बा'द तेरी ख़्वाहिश नहीं है कोई
इस दिल का आख़िरी जो है वो ज़वाल हो तुम

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हालत को उस की देख परिंदे नहीं उड़े
कोना फटा हुआ था शिकारी के जाल का

इल्ज़ाम यूँँ तो रख दिया हर ऐन-ग़ैन पर
ख़ुद मैं ही ज़िम्मेदार था अपने ज़वाल का

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ख़यालों में, नज़ारों में, किताबों में, सवालों में
कि मुझ को याद आए तुम, सफ़र के इन ज़वालों में

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बैठा है क्यूँ उदास तू चल ढूँडते हैं हम
आओ सुकून चैन के पल ढूँडते हैं हम

हम ने सुना है यार उदासी ज़वाल है
मिल कर के इस ज़वाल हल ढूँडते हैं हम

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ज़िन्दगी मुस्तक़िल वबाल रही
हर घड़ी थी ज़वाल की सूरत

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गर यही है उरूज मेरा तो
ऐ ख़ुदा फिर ज़वाल अच्छा है

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है तिरा ही ख़याल तो मुझ को
है तिरा ही ज़वाल तो मुझ को

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मैं क्या बताऊँ के मैं किस मकाम पर हूँ खड़ा
मेरे अरुज़ से पहले मेरा ज़वाल हुआ

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आया ही नहीं है इस का तो मुझे ख़याल तक
रूह को बचा के रखना है मुझे ज़वाल तक

झूठ बोलने पे हम से तो सवाल भी हुआ
उस ने क़त्ल भी किया हुआ नहीं बवाल तक

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ऐसे हालात से मजबूर बशर देखे हैं
अस्ल क्या सूद में बिकते हुए घर देखे हैं

हम ने देखा है वज़ादार घरानों का जवाल
हम ने सड़कों पे कई शाह ज़फ़र देखे है

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ज़वाल पतन या अवनति की अवधि को दर्शाता है। कविता में, यह अक्सर समय के अनिवार्य प्रवाह और महिमा के क्षय का प्रतीक होता है। यह शब्द जीवन की क्षणभंगुरता को दर्शाते हुए एक उदासीन स्वर लिए होता है।

कवि ज़वाल का उपयोग खोई हुई भव्यता या सुंदरता के अनिवार्य पतन के दुख को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह जीवन की अस्थिरता की याद दिलाता है।

ज़वाल समय के प्रवाह की सच्चाई को फुसफुसाता है, जीवन की क्षणभंगुरता की एक कोमल याद दिलाता है।