हालत को उस की देख परिंदे नहीं उड़ेकोना फटा हुआ था शिकारी के जाल काइल्ज़ाम यूँ तो रख दिया हर ऐन-ग़ैन परख़ुद मैं ही ज़िम्मेदार था अपने ज़वाल का— Abdulla Asif