Meaning of

ज़हर-ए-ख़मोशी

zahr-e-khamoshi • زہر خاموشی

ख़ामोशी का ज़हर; घातक चुप्पी

poison of silence; deadly quiet

خاموشی کا زہر; مہلک خاموشی

Persian

मैं भटकता ही रहा दश्त-ए-शनासाई में कोई उतरा ही नहीं रूह की गहराई में क्या मिलाया है बता जाम-ए-पज़ीराई में ख़ूब नश्शा है तेरी हौसला-अफ़जाई में तेरी यादों की सुई, प्रेम का धागा मेरा काम आए हैं बहुत ज़ख़्मों की तुरपाई में डस रही है ये सियह-रात की नागिन मुझ को भर रही ज़हर-ए-ख़मोशी, रग-ए-तन्हाई में सुर्मा-ए-मक्र-ओ-फ़रेब आँखों में जब से है लगा तब से है ख़ूब इज़ाफ़ा हद-ए-बीनाई में फ़िक्र-ओ-फ़न, रंग-ए-तग़ज़्ज़ुल, न ग़ज़ल की ख़ुशबू बस लगा रहता हूँ मैं क़ाफ़िया-पैमाई में सीख पानी से हुनर काम 'अनीस' आएगा दौड़ कर ख़ुद ही चला आता है गहराई में — Anis shah anis

ज़हर-ए-ख़मोशी ख़ामोशी की घुटन और विनाशकारी शक्ति को दर्शाता है। कविता में, यह अक्सर अनकही तनावों और भावनात्मक उथल-पुथल को दर्शाता है जो ख़ामोशी ला सकती है।

कवि ज़हर-ए-ख़मोशी का उपयोग दबे हुए भावनाओं और अनकहे विचारों के छिपे खतरों के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह अभिव्यक्ति से आने वाले राहत के विपरीत है।

ज़हर-ए-ख़मोशी हमें भीतर की मौन लड़ाइयों और ख़ामोशी के बीच आवाज़ की आवश्यकता की याद दिलाता है।