Meaning of

ज़ाविये

zaawiye • زاویے

कोण; दृष्टिकोण

angles; perspectives

زاوئے; نقطہ نظر

Arabic

कभी अपनी आँख से ज़िंदगी पे नज़र न की
वही ज़ाविए कि जो आम थे मुझे खा गए

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दो आँखें हैं दो पलकें हैं जबीं है चूमने ख़ातिर
बहुत से ज़ाविए हैं उस बदन में देखने लाइक़

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अब ऐसे ज़ाविए पर लौ रखी जाने लगी है
चराग़ों के तले भी रौशनी जाने लगी है

नया पहलू सलीक़े से बयाँ करना पड़ेगा
कहानी अब तवज्जोह से सुनी जाने लगी है

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तिलमिलाते हैं दुआ से दिल-जले अहबाब में
आज कल आते हैं मेरे ज़ाविये सुरख़ाब में

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देखो जिस ज़ाविए से दिल-कश है
वो तो माह-ए-तमाम है 'क़ैसर'

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जहाँ सुकूँ मिले उस ज़ाविए में ढाल मुझे
तिरा ही अक्स हूँ बच्चों की तरह पाल मुझे

मैं हर क़दम पे तिरे साथ ही रहूँगा दोस्त
तू आँख मीच के इक बार तो उछाल मुझे

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हर रात ख़त्म होती है हर सुब्ह-दम शुरूअ
इस ज़ाविये से देखता हूँ ज़िंदगी को मैं

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हर एक ज़ाविए से वो बदन शगुफ़्ता है
मुझे ये डर है कि मुरझा न जाए छूने से

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रंग ख़ुश्बू फूल-तितली सागर-ओ-मीना के बा'द
अब ग़ज़ल को कुछ नए ही ज़ाविए दरकार हैं

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कभी अपनी आँख से ज़िंदगी पे नज़र न की
वही ज़ाविए कि जो आम थे मुझे खा गए

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दो आँखें हैं दो पलकें हैं जबीं है चूमने ख़ातिर
बहुत से ज़ाविए हैं उस बदन में देखने लाइक़

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'ज़ाविये' का मूल अर्थ ज्यामितीय कोण या दृष्टिकोण है, जिससे किसी वस्तु को देखा जाता है। कविता में, यह जीवन और भावनाओं को देखने के अनेक तरीकों की ओर इशारा करता है, जहाँ हर कोण एक अलग अंतर्दृष्टि या सत्य प्रस्तुत करता है।

कवि 'ज़ाविये' का उपयोग मानव भावनाओं की जटिलता को खोजने के लिए करते हैं। यह सुझाव देता है कि हर अनुभव को कई कोणों से देखा जा सकता है, प्रत्येक एक अनोखा सत्य प्रकट करता है। यह एकल दृष्टिकोण के विचार के विपरीत है, समझ में विविधता पर जोर देता है।

'ज़ाविये' हमें दृष्टिकोणों की बहुलता को अपनाने के लिए आमंत्रित करता है, जो हमारी दुनिया की समझ को समृद्ध करता है।