जहाँ सुकूँ मिले उस ज़ाविए में ढाल मुझेतिरा ही अक्स हूँ बच्चों की तरह पाल मुझेमैं हर क़दम पे तिरे साथ ही रहूँगा दोस्ततू आँख मीच के इक बार तो उछाल मुझे— Harsh Kumar Bhatnagar