ये चराग़ों का ही उजाला है
वर्ना हर दिल में तो अँधेरा है
आप गर एहतियात भी रखते
तो समझ आता इश्क़ धोखा है
देखता ही नहीं हुनर कोई
पूछते हैं कि क्या कमाता है
तितलियाँ बैठती हैं शाने पर
उस ने जब से गुलाब चूमा है
दुश्मनी ख़त्म करनी थी हम को
इस लिए ख़त में फूल भेजा है
— Harsh Kumar Bhatnagar















