Meaning of

ज़ियाँ

ziyaan • زیاں

हानि; अपव्यय

loss; waste

زیاں; ضیاع

Persian

महलों के बाशिंदों ने कब बाहर ये देखा है
बस्ती की पगडंडी पर कितने आदम पड़े हुए हैं

जिन जिन लोगों ने शिरकत की है मेरी मय्यत में
देखोगे तो जानोगे सब बन्दे मरे हुए हैं

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क्या हुआ जो मुझे हम-उम्र मोहब्बत न मिली
मेरी ख़्वाहिश भी यही थी कि बड़ी आग लगे

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कौन सूद-ओ-ज़ियाँ की दुनिया में
दर्द ग़ुर्बत का साथ देता है

जब मुक़ाबिल हों इश्क़ और दौलत
हुस्न दौलत का साथ देता है

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वक़्फ़ हो "अशरफ़" वफ़ा की राह पर तुम इस लिए
ख़्वाहिशों को मार दो, ख़ुदगरज़ियाँ अंदर रखो

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दिन भर भूखा रह कर ही तुम जानोगे
रोटी का भी स्वाद निराला होता है

जिन का साथ नहीं देती दुनिया सारी
उन का ही बस ऊपर वाला होता है

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कौन होगा जिस किसी के ख़्वाब में फिर तू न आए
नींद भी उड़ जाए उस की जो किसी को तू बुलाए

देख ले तुझ को अगर यूँँ ही कहीं जो हारता फिर
जीत भी हासिल जिसे हो बाज़ियाँ वो हार जाए

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आज तस्वीर उस की देखी है
आज फिर नींद का ज़ियाँ होगा

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अक़्ल कहती है कि सौदा है ज़ियाँ का
और तुझे दिल बे तहाशा चाहता है

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बिछड़ोगे तब तुम जानोगे
क्या होता है यादों का दुख

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भला तुम कैसे जानोगे मिला है दर्द जो गहरा
वो जैसे नोचता है बाल अपने नोच कर देखो

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महलों के बाशिंदों ने कब बाहर ये देखा है
बस्ती की पगडंडी पर कितने आदम पड़े हुए हैं

जिन जिन लोगों ने शिरकत की है मेरी मय्यत में
देखोगे तो जानोगे सब बन्दे मरे हुए हैं

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क्या हुआ जो मुझे हम-उम्र मोहब्बत न मिली
मेरी ख़्वाहिश भी यही थी कि बड़ी आग लगे

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'ज़ियाँ' शब्द हानि और बर्बाद हुई संभावनाओं का भाव प्रकट करता है। कविता में, यह अक्सर छूटे हुए अवसरों और समय के अपरिवर्तनीय प्रवाह के दुःख को दर्शाता है। यह शब्द उदासी का भार लिए होता है, जो गहरे पछतावे और विचारशीलता को जगाता है।

कवि 'ज़ियाँ' का उपयोग पछतावे और समय के प्रवाह की थीम को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह जो था और जो हो सकता था के बीच के विरोधाभास को उजागर कर सकता है। यह शब्द अक्सर चिंतनशील और गंभीर संदर्भों में प्रकट होता है, अपरिवर्तनीय परिवर्तन के सार को पकड़ता है।

कविता में, 'ज़ियाँ' समय की नाजुकता और अधूरे सपनों के भार की एक मार्मिक याद दिलाता है।