
महलों के बाशिंदों ने कब बाहर ये देखा है
बस्ती की पगडंडी पर कितने आदम पड़े हुए हैं
जिन जिन लोगों ने शिरकत की है मेरी मय्यत में
देखोगे तो जानोगे सब बन्दे मरे हुए हैं
— Saahir
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