Meaning of

ज़ुल्म-ओ-सितम

zulm-o-sitam • ظلم و ستم

अत्याचार और ज़ुल्म; क्रूरता

oppression and tyranny; cruelty

ظلم و ستم; ظلم

Arabic

देख कर ज़ुल्म-ओ-सितम मज़लूम पर आज फिर इंसानियत शर्मा गई — Shajar Abbas
ख़ुद ब ख़ुद बुझ जाएँगे ज़ुल्म-ओ-सितम के सब दिए सब जलाएँ गर जो इंसाफ़- ओ- अदल का इक दिया — A R Sahil "Aleeg"
क्या ये भी किसी जंग के ऐलान से कम है हम सह के तेरे ज़ुल्म-ओ-सितम घूम रहे हैं — YAWAR ALI
मुझ को ज़ुल्म ओ सितम से है मारा गया फूल को ख़ार से यूँँ सँवारा गया — Samar
हज़रत-ए-दिल पे इतने ज़ुल्म-ओ-सितम हुस्न-दाँ मत करो ख़ुदा के लिए — Shajar Abbas
पड़ेगा कूदना मँझधार में गर चाहिए मोती किसी ने भी नहीं पाया कभी मोती किनारों पर — SAAGAR SINGH RAJPUT

यह वाक्यांश अन्यायपूर्ण शासन की कठोरता और उसके द्वारा किए गए कष्टों को दर्शाता है। कविता में, यह अक्सर सामाजिक और व्यक्तिगत अन्याय की एक शक्तिशाली आलोचना के रूप में कार्य करता है।

कवि 'ज़ुल्म-ओ-सितम' का उपयोग प्रतिरोध और सहनशीलता के विषयों को उजागर करने के लिए करते हैं। इसे अक्सर आशा और दृढ़ता के साथ जोड़ा जाता है, जिससे एक गतिशील तनाव उत्पन्न होता है।

कविता के क्षेत्र में, 'ज़ुल्म-ओ-सितम' अत्याचार के खिलाफ अनंत संघर्ष की गूंज है।