Meaning of

ज़ेहन-ओ-दिल

Zehn-o-dil • ذہن و دل

मन और दिल; बुद्धि और भावना

mind and heart; intellect and emotion

ذہن اور دل; عقل اور جذبات

Persian

हर घड़ी इस ज़ेहन-ओ-दिल में गुफ़्तगू क्या है
कोई समझाए हमें ये जुस्तुजू क्या है

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मेरे तो ज़्हन-ओ-दिल को बस यही ग़म खा रहा है
कोई मुझ से भी ज़्यादा पास तेरे आ रहा है

कुछ इस दरजा तुझे नज़दीक से जाना है मैं ने
कि अब "जस्सर", तेरी निस्बत से दिल उकता रहा है

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ज़ेहन-ओ-दिल में मेरे पेच है इक फँसी तुझ को जाना है तो जा चला जा अभी
इश्क़ है तुझ सेे या है महज़ दिल-लगी तुझ को जाना है तो जा चला जा अभी

ये तअल्लुक़ भी आसाँ नहीं हम-सफ़र मोड़ आने हैं आएँगे आगे मगर
घर पलटने का ये मोड़ है आख़िरी तुझ को जाना है तो जा चला जा अभी

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हर घड़ी इस ज़ेहन-ओ-दिल में गुफ़्तगू क्या है
कोई समझाए हमें ये जुस्तुजू क्या है

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मेरे तो ज़्हन-ओ-दिल को बस यही ग़म खा रहा है
कोई मुझ से भी ज़्यादा पास तेरे आ रहा है

कुछ इस दरजा तुझे नज़दीक से जाना है मैं ने
कि अब "जस्सर", तेरी निस्बत से दिल उकता रहा है

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'ज़ेहन-ओ-दिल' मानव अनुभव की द्वैतता को दर्शाता है, जहाँ मन की तर्कशीलता दिल की भावनाओं से मिलती है। कविता में, इस द्वैतता का उपयोग अक्सर विचार और भावना के बीच के तनाव और सामंजस्य को प्रकट करने के लिए किया जाता है।

कवि अक्सर 'ज़ेहन-ओ-दिल' का उपयोग तर्कसंगतता और भावना के बीच के संघर्ष को दर्शाने के लिए करते हैं। यह एक प्रेमी के आंतरिक संघर्ष का प्रतीक हो सकता है जो तर्क और जुनून के बीच फंसा हुआ है। यह गहन अंतर्दृष्टि के क्षणों में विचार और भावना की एकता को भी दर्शा सकता है।

'ज़ेहन-ओ-दिल' के नृत्य में, कविता अपनी सबसे मानवीय अभिव्यक्ति पाती है। यह वह जगह है जहाँ विचार और भावना गले मिलते हैं।