Meaning of

जिरह

jirh • فقیر

जिरह; बहस; तर्क

cross-examination; debate; argument

جراح; بحث; دلیل

Arabic

अपने हाकिम की फ़कीरी पे तरस आता है जो ग़रीबों से पसीने की कमाई माँगे — Rahat Indori
तुम्हारी गालियों का अब असर होता नहीं मुझ पर ज़रा ही देर बैठा था मैं सोहबत में फकीरों की। — Prashant Arahat
फ़क़ीर-ए-शहर के तन पर लिबास बाक़ी है अमीर-ए-शहर के अरमाँ अभी कहाँ निकले — Sahir Ludhianvi
बना कर फ़क़ीरों का हम भेस 'ग़ालिब' तमाशा-ए-अहल-ए-करम देखते हैं — Mirza Ghalib
फ़क़ीरों से न पूछो तुम ख़ुदा ने क्या दिया उन को ये वो बंदे हैं जिन को अब ख़ुदा से चोट लगती है — Rakesh Mahadiuree
यारी फ़क़ीरों से रखेंगे अब दूरी अमीरों से रखेंगे अब — Manoj Devdutt

मूल रूप से, 'जिरह' कानूनी या औपचारिक संदर्भ में जिरह या बहस के कार्य को संदर्भित करता है। कविता में, यह उन आंतरिक संघर्षों और संवादों का प्रतीक हो सकता है जो किसी के विचारों और विश्वासों को आकार देते हैं।

कवि 'जिरह' का उपयोग संदेह और आत्मनिरीक्षण के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह दिल और दिमाग के बीच के तनाव या विरोधाभासी भावनाओं को समेटने के संघर्ष को दर्शा सकता है।

'जिरह' आत्म की गहरी समझ को आमंत्रित करता है, जहाँ प्रश्न स्पष्टता की ओर मार्ग बन जाते हैं।