Meaning of

जिरह

jirh • فقیر

जिरह; बहस; तर्क

cross-examination; debate; argument

جراح; بحث; دلیل

Arabic

बहुत ही आजिज़-ओ-मुफलिस दिल-ए-फकीर के साथ
करेगा कौन भला इश्क़ इस हकीर के साथ

2

Download Image

अपने हाकिम की फ़कीरी पे तरस आता है
जो ग़रीबों से पसीने की कमाई माँगे

58

Download Image

बना कर फ़क़ीरों का हम भेस 'ग़ालिब'
तमाशा-ए-अहल-ए-करम देखते हैं

40

Download Image

तुम्हारी गालियों का अब असर होता नहीं मुझ पर
ज़रा ही देर बैठा था मैं सोहबत में फकीरों की।

33

Download Image

हम फ़क़ीरों की सूरतों पे न जा
हम कई रूप धार लेते हैं

ज़िंदगी के उदास लम्हों को
मुस्कुरा कर गुज़ार लेते हैं

15

Download Image

मैं ने आ'साब को पत्थर का बना रक्खा है
एक दिल है कि जो बनता नहीं पत्थर जैसा

हम फ़क़ीरों को कभी रास न आया वरना
हम ने पाया था मुक़द्दर तो सिकंदर जैसा

15

Download Image

फ़क़ीरों से न पूछो तुम ख़ुदा ने क्या दिया उन को
ये वो बंदे हैं जिन को अब ख़ुदा से चोट लगती है

14

Download Image

फ़क़ीर-ए-शहर के तन पर लिबास बाक़ी है
अमीर-ए-शहर के अरमाँ अभी कहाँ निकले

13

Download Image

क्यूँ किया करते हो तुम ज़ुल्म मुसलसल हम पर
तुम हो इंसान तो फिर इस का हवाला दे दो

तुम को है नाज़ अमीरी पे तो सुन लो 'दानिश'
हम फ़क़ीरों को ज़रा एक निवाला दे दो

13

Download Image

आह से उन की हुकूमत न पलट जाए कहीं
हुक्मराँ हो के फ़क़ीरों को सताया न करो

2

Download Image

बहुत ही आजिज़-ओ-मुफलिस दिल-ए-फकीर के साथ
करेगा कौन भला इश्क़ इस हकीर के साथ

2

Download Image

अपने हाकिम की फ़कीरी पे तरस आता है
जो ग़रीबों से पसीने की कमाई माँगे

58

Download Image

मूल रूप से, 'जिरह' कानूनी या औपचारिक संदर्भ में जिरह या बहस के कार्य को संदर्भित करता है। कविता में, यह उन आंतरिक संघर्षों और संवादों का प्रतीक हो सकता है जो किसी के विचारों और विश्वासों को आकार देते हैं।

कवि 'जिरह' का उपयोग संदेह और आत्मनिरीक्षण के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह दिल और दिमाग के बीच के तनाव या विरोधाभासी भावनाओं को समेटने के संघर्ष को दर्शा सकता है।

'जिरह' आत्म की गहरी समझ को आमंत्रित करता है, जहाँ प्रश्न स्पष्टता की ओर मार्ग बन जाते हैं।