मैंने आ'साब को पत्थर का बना रक्खा है
एक दिल है कि जो बनता नहीं पत्थर जैसा
हम फ़क़ीरों को कभी रास न आया वरना
हमने पाया था मुक़द्दर तो सिकंदर जैसा
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