मैं ने आ'साब को पत्थर का बना रक्खा हैएक दिल है कि जो बनता नहीं पत्थर जैसाहम फ़क़ीरों को कभी रास न आया वरनाहम ने पाया था मुक़द्दर तो सिकंदर जैसा— Saqi Amrohvi