Meaning of

जुज़

juz • جز

भाग; अंश

part; portion

جزء; حصہ

Arabic

ज़िन्दगी नाम हक़ीक़त में हैं शादानी का
इस को तुम जुज़ न बनाना कभी वीरानी का

नौजवानो मेरा पैग़ाम सदा याद रखो
ख़ुद-कुशी हल नहीं होती है परेशानी का

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ये तो बढ़ती ही चली जाती है मीआद-ए-सितम
ज़ुज़ हरीफ़ान-ए-सितम किस को पुकारा जाए

वक़्त ने एक ही नुक्ता तो किया है ता'लीम
हाकिम-ए-वक़त को मसनद से उतारा जाए

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'अल्वी' ये मो'जिज़ा है दिसम्बर की धूप का
सारे मकान शहर के धोए हुए से हैं

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असर करती है कोई-कोई बात आहिस्ता आहिस्ता
समझ में आते हैं कुछ मोजज़ात आहिस्ता आहिस्ता

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ब-जुज़ ख़ुदा के किसी का हम पे करम नहीं है ये कम नहीं है
किसी का सजदा जबीं पे अपनी रक़म नहीं है ये कम नहीं है

हमारी चुप्पी ये है ग़नीमत वगरना ये जो किया है तुम ने
यक़ीन मानो हमारा माथा गरम नहीं है ये कम नहीं है

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असर करती है कोई-कोई बात आहिस्ता आहिस्ता
समझ में आते हैं कुछ मोजज़ात आहिस्ता आहिस्ता

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अब इस सेे बढ़के कोई मो'जिज़ा भला क्या हो
कि लोग इश्क़ में मरते हैं और मरते नहीं

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मु-ए-जुज़ 'मीर' जो थे फ़न के उस्ताद
यही इक रेख़्ता-गो अब रहा है

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ताक़ पर जुज़दान में लिपटी दुआएँ रह गईं
चल दिए बेटे सफ़र पर घर में माएँ रह गईं

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चूम कर ज़ख़्म फिर से हरा कर दिया
क्या लगा था तुम्हें मोजिज़ा कर दिया

आप के इश्क़ का क़र्ज़ था मुझ पे जो
काटकर हिज्र की शब अदा कर दिया

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ज़िन्दगी नाम हक़ीक़त में हैं शादानी का
इस को तुम जुज़ न बनाना कभी वीरानी का

नौजवानो मेरा पैग़ाम सदा याद रखो
ख़ुद-कुशी हल नहीं होती है परेशानी का

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ये तो बढ़ती ही चली जाती है मीआद-ए-सितम
ज़ुज़ हरीफ़ान-ए-सितम किस को पुकारा जाए

वक़्त ने एक ही नुक्ता तो किया है ता'लीम
हाकिम-ए-वक़त को मसनद से उतारा जाए

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जुज़ संपूर्ण का एक खंड या अंश होने का विचार व्यक्त करता है। कविता में, यह अक्सर इस विचार का प्रतिनिधित्व करता है कि सबसे छोटा हिस्सा भी महत्व और अर्थ रखता है। यह शब्द सुझाव देता है कि हर टुकड़ा संपूर्ण में योगदान देता है।

कवि जुज़ का उपयोग छोटे विवरणों या क्षणों के महत्व को उजागर करने के लिए करते हैं। यह इस विचार को दर्शाता है कि हर टुकड़ा, चाहे कितना भी छोटा हो, संपूर्ण के लिए महत्वपूर्ण है।

जुज़ हमें याद दिलाता है कि हर टुकड़ा एक कहानी रखता है, जीवन की कथा के लिए प्रत्येक हिस्सा आवश्यक है।