ये तो बढ़ती ही चली जाती है मीआद-ए-सितम ज़ुज़ हरीफ़ान-ए-सितम किस को पुकारा जाएवक़्त ने एक ही नुक्ता तो किया है ता'लीमहाकिम-ए-वक़त को मसनद से उतारा जाए— Jaun Elia