Meaning of

तजुर्बा

tajurba • شخص

अनुभव; परीक्षा

experience; trial

تجربہ; آزمائش

Arabic

जिन पर मुझे दिन रात उलफ़त चाहतों पर आस है
उन को नहीं लगता कि ये इक शख़्स भी कुछ ख़ास है

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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा
कुछ न होगा तो तजरबा होगा

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किसी ने मुफ्त में वो शख़्स पाया
जो हर कीमत पे मुझ को चाहिए था

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तसव्वुर तजरबा तेवर तमन्ना और तन्हाई
मिलेंगे फूल सब इस
में ग़ज़ल गुलदान है यारों

पढ़ाई नौकरी शादी फिर उस के बा'द दो बच्चे
हमारी ज़िन्दगी इतनी कहाँ आसान है यारों

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अब समझ लेते हैं मीठे लफ़्ज़ की कड़वाहटें
हो गया है ज़िंदगी का तजरबा थोड़ा बहुत

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दोस्तों के साथ चलने में भी ख़तरे हैं हज़ार
भूल जाता हूँ हमेशा मैं सँभल जाने के बा'द

अब ज़रा सा फ़ासला रख कर जलाता हूँ चराग़
तजरबा ये हाथ आया हाथ जल जाने के बा'द

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मैं हूँ वो आइना जिस
में के शख़्सियत तेरी
हुई जो रू-ब-रू तो टूट फूट जाएगी

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ज़ख़्म है दर्द है दवा भी है
जैसे जंगल है रास्ता भी है

यूँँ तो वादे हज़ार करता है
और वो शख़्स भूलता भी है

हम को हर सू नज़र भी रखनी है
और तेरे पास बैठना भी है

यूँँ भी आता नहीं मुझे रोना
और मातम की इब्तिदा भी है

चूमने हैं पसंद के बादल
शाम होते ही लौटना भी है

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तज़ुर्बा ये हुआ है ज़िन्दगी में
न होता कोई अपना मुफ़लिसी में

ज़बाँ ज़ख़्मों को मेरे मिल गई है
उन्हें शामिल किया जब शा'इरी में

ग़ज़ब का दिल बनाया है ख़ुदा ने
छलक पड़ते हैं आँसू भी ख़ुशी में

ख़ुशी का एक लम्हा कीमती है
हज़ारों ग़म हैं लेकिन ज़िन्दगी में

बुरा हूँ मैं मुझे अच्छा कहा है
शराबी ने यक़ीनन बेख़ुदी में

मुझे हँसता हुआ देखा तो कहते वो
कोई तो बात है इस आदमी में

मेरे रब मुझ को ये तौफ़ीक़ दे दे
रहूँ हँसता सदा ग़म और ख़ुशी में

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चंद लम्हों में कोई शख़्स पसंद आता है
और पाने में उसे उम्र गुज़र जाती है

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जिन पर मुझे दिन रात उलफ़त चाहतों पर आस है
उन को नहीं लगता कि ये इक शख़्स भी कुछ ख़ास है

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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा
कुछ न होगा तो तजरबा होगा

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तजुर्बा जीवन के क्षणों का संग्रह है, जो साधारण और गहन दोनों होते हैं। कविता में यह शब्द एक ज्ञान और आत्मनिरीक्षण का माध्यम बन जाता है, जहाँ हर अनुभव एक पाठ है, एक कहानी जो सुनाई जानी है।

कवि अक्सर 'तजुर्बा' का उपयोग समय के प्रवाह और उससे प्राप्त ज्ञान को दर्शाने के लिए करते हैं। यह अतीत और वर्तमान के बीच एक पुल है, सीखे गए पाठों और शेष निशानों की याद दिलाता है।

कविता में 'तजुर्बा' मानव यात्रा का प्रमाण है, आत्मा के विकास का मौन साक्षी।