Meaning of

तर्ज

tarj • طرز

शैली; तरीका

style; manner

انداز; طریقہ

Arabic

मयकशी का मिले लुत्फ़ मुझ को ज़रा
मेरी आँखों से आँखें मिला हम-नवा

मैं ने देखा नहीं है मुकम्मल तुझे
अपने रुख़ से तू पर्दा हटा हम-नवा

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तेरी रंजिश खुली तर्ज-ए-बयाँ से
न थी दिल में तो क्यूँँ निकली ज़बाँ से

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इक तर्ज़-ए-तग़ाफ़ुल है सो वो उन को मुबारक
इक अर्ज़-ए-तमन्ना है सो हम करते रहेंगे

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वो एक दिन जो तुझे सोचने में गुज़रा था
तमाम उम्र उसी दिन की तर्जुमानी है

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अपने क़ातिल की ज़ेहानत से परेशान हूँ मैं
रोज़ इक मौत नए तर्ज़ की ईजाद करे

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कहाँ से चला था निग़ाहों में क्या था कहाँ जा रहा था मुझे सोचने दो
मेरा साज़ क्या था मेरी तर्ज़ क्या थी मैं क्या गा रहा था मुझे सोचने दो

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फिर वही होगी मुहब्बत और वही तर्ज़-ए-ख़ुलूस
अपने ज़ेहनों से तसव्वुर को जुदा तो कीजिए

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मिरी रूह की हक़ीक़त मिरे आँसुओं से पूछो
मिरा मज्लिसी तबस्सुम मिरा तर्जुमाँ नहीं है

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इस तरह मैं ने हवस पर इश्क़ को तरजीह दी
उस का माथा चूमा भी तो हाथ रख के चूमा है

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ग़ैर-वाजिब है कि ग़ैरों की ज़बाँ है उर्दू
हिन्द के तर्ज़-ओ-तमद्दुन का निशाँ है उर्दू

जिस को ख़ुद अपनी ही औलाद ने पागल है किया
रंज में डूबी हुई ऐसी ही माँ है उर्दू

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मयकशी का मिले लुत्फ़ मुझ को ज़रा
मेरी आँखों से आँखें मिला हम-नवा

मैं ने देखा नहीं है मुकम्मल तुझे
अपने रुख़ से तू पर्दा हटा हम-नवा

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तेरी रंजिश खुली तर्ज-ए-बयाँ से
न थी दिल में तो क्यूँँ निकली ज़बाँ से

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'तर्ज' अपने मूल में एक विशिष्ट शैली या तरीके को संदर्भित करता है। कविता में, यह कवि की अनूठी आवाज़ या हस्ताक्षर को पकड़ता है, जिस तरह से वे शब्दों और भावनाओं को अर्थ की एक बुनाई में पिरोते हैं।

कवि अक्सर अपनी व्यक्तिगत शैली को उजागर करने के लिए 'तर्ज' का उपयोग करते हैं। यह उनकी रचनात्मक पहचान का उत्सव है, जो उनके काम को दूसरों से अलग करता है। यह कविता के विषयगत या भावनात्मक स्वर को भी संदर्भित कर सकता है।

कविता में, 'तर्ज' व्यक्तित्व का सार है, कवि की अनूठी आवाज़ और दृष्टि का प्रमाण है।