Meaning of

नाज

naaz • ناز

गर्व; शान

pride; elegance

فخر; شان

Persian

नाज़ुकी उस के लब की क्या कहिए
पंखुड़ी इक गुलाब की सी है

51

Download Image

जनाज़े पर मेरे लिख देना यारों
मोहब्बत करने वाला जा रहा है

126

Download Image

तुम उन के वा'दे का ज़िक्र उन से क्यूँँ करो 'ग़ालिब'
ये क्या कि तुम कहो और वो कहें कि याद नहीं

124

Download Image

तेरी निगाह-ए-नाज़ से छूटे हुए दरख़्त
मर जाएँ क्या करें बता सूखे हुए दरख़्त

हैरत है पेड़ नीम के देने लगे हैं आम
पगला गए हैं आप के चू
में हुए दरख़्त

96

Download Image

किसी से छोटी सी एक उम्मीद बाँध लीजिए
मोहब्बतों का अगर जनाज़ा निकालना है

71

Download Image

है राम के वजूद पे हिन्दोस्ताँ को नाज़
अहल-ए-नज़र समझते हैं उस को इमाम-ए-हिंद

66

Download Image

दर्द ऐसा नज़र-अंदाज़ नहीं कर सकते
जब्त ऐसा की हम आवाज नहीं कर सकते

बात तो तब थी कि तू छोड़ के जाता ही नहीं
अब तेरे मिलने पे हम नाज नहीं कर सकते

64

Download Image

छू लेने दो नाज़ुक होंठों को, कुछ और नहीं हैं जाम हैं ये
क़ुदरत ने जो हम को बख़्शा है, वो सब सेे हसीं ईनाम हैं ये

63

Download Image

है नाज़ मुझ को अपनी हिंदी ज़बाँ पे यारो
हिंदी हैं हम वतन हैं ये देश सब सेे आला

55

Download Image

कुर्सी है तुम्हारा ये जनाज़ा तो नहीं है
कुछ कर नहीं सकते तो उतर क्यूँ नहीं जाते

55

Download Image

नाज़ुकी उस के लब की क्या कहिए
पंखुड़ी इक गुलाब की सी है

51

Download Image

जनाज़े पर मेरे लिख देना यारों
मोहब्बत करने वाला जा रहा है

126

Download Image

नाज़ गर्व और गरिमा की भावना को समेटे हुए है, एक शान जो शाही और कोमल दोनों है। कविता में, यह आत्म-सम्मान और विनम्रता के बीच के नाजुक संतुलन को उजागर करता है।

कवि 'नाज़' का उपयोग गरिमा और सुंदरता के विषयों को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह एक आत्मा के शांत आत्मविश्वास का प्रतीक हो सकता है जो अपनी कीमत जानता है।

नाज़ एक आत्मा की कोमल संतुलन है जो स्वयं के साथ सामंजस्य में है।