दर्द ऐसा नज़र-अंदाज़ नहीं कर सकतेजब्त ऐसा की हम आवाज नहीं कर सकतेबात तो तब थी कि तू छोड़ के जाता ही नहींअब तेरे मिलने पे हम नाज नहीं कर सकते— Ismail Raaz