Meaning of

निसार

nisaar • نثار

बलिदान; समर्पण; अर्पण

sacrifice; dedication; offering

قربانی; نذر; پیشکش

Persian

मैं तो सफों के दरमियाँ कब से पड़ा हूँ नीम जाँ, मेरे तमाम जाँ निसार मेरे लिए तो मर गए — Jaun Elia
जो वतन पर निसार हो जाए वो भगत सिंह के जैसा लाल कहाँ — Navneet krishna
तुम को क्या ख़बर तुम से कितना प्यार करते हैं जान हम तेरी ख़ातिर जाँ निसार करते हैं — Danish Balliavi
हिज्र में बे-क़रार रहने दिया दिल उसी पर निसार रहने दिया — RIZWAN ALI RIZWAN
तू बे-वफ़ा ही सही तुझ से प्यार आज भी है तिरे लिए ये दिल-ओ-जाँ निसार आज भी है — Aarif hasan khan
कोई आसाँ नहीं गुलज़ार करना प्यार का गुलशन जिगर के ख़ून से सींचो इसे तब जा के खिलता है — Nityanand Vajpayee
हम तिरे पर ही ये जाँ-निसार करते हैं इस लिए तो थोड़ा इख़्तियार करते हैं — arjun chamoli

निसार एक गहरी निःस्वार्थता का भाव उत्पन्न करता है, जहाँ कोई बिना किसी प्रत्याशा के कुछ मूल्यवान अर्पित करता है। कविता में, यह प्रेम और समर्पण का सार पकड़ता है, जहाँ प्रिय की खुशी सर्वोपरि होती है और व्यक्तिगत इच्छाएँ स्वेच्छा से त्याग दी जाती हैं।

कवि अक्सर निसार का उपयोग प्रेम के अंतिम कार्य को व्यक्त करने के लिए करते हैं, जहाँ प्रेमी का बलिदान उनकी भक्ति का प्रमाण बन जाता है। इसका उपयोग प्रिय की खुशी के लिए स्वयं को पूरी तरह से समर्पित करने की सुंदरता को उजागर करने के लिए किया जाता है। यह शब्द स्वार्थ के विपरीत है, हृदय की पवित्रता और महानता को उजागर करता है।

निसार प्रेम के बलिदान की पवित्रता को समेटे हुए है, हृदय की महानता का एक शाश्वत प्रमाण।