main to safon ke darmiyaan kab se pada hoon neem jaan | मैं तो सफों के दरमियां कब से पड़ा हूं नीम जाँ,

  - Jaun Elia

मैं तो सफों के दरमियां कब से पड़ा हूं नीम जाँ,
मेरे तमाम जाँ निसार मेरे लिए तो मर गए

  - Jaun Elia

Anjam Shayari

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    अब मुझ को ए'तिमाद की दावत न दे कोई

    मैं ख़ुद ये चाहता हूँ कि हालात हों ख़राब
    मेरे ख़िलाफ़ ज़हर उगलता फिरे कोई

    ऐ शख़्स अब तो मुझ को सभी कुछ क़ुबूल है
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    Jaun Elia
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