Meaning of

पज़ीर

pazir • پذیر

स्वीकार करने वाला; ग्रहणशील

accepting; receptive

قبول کرنے والا; پذیرائی کرنے والا

Persian

कू-ब-कू फैल गई बात शनासाई की उस ने ख़ुश्बू की तरह मेरी पज़ीराई की — Parveen Shakir
मैं भटकता ही रहा दश्त-ए-शनासाई में कोई उतरा ही नहीं रूह की गहराई में क्या मिलाया है बता जाम-ए-पज़ीराई में ख़ूब नश्शा है तेरी हौसला-अफ़जाई में तेरी यादों की सुई, प्रेम का धागा मेरा काम आए हैं बहुत ज़ख़्मों की तुरपाई में डस रही है ये सियह-रात की नागिन मुझ को भर रही ज़हर-ए-ख़मोशी, रग-ए-तन्हाई में सुर्मा-ए-मक्र-ओ-फ़रेब आँखों में जब से है लगा तब से है ख़ूब इज़ाफ़ा हद-ए-बीनाई में फ़िक्र-ओ-फ़न, रंग-ए-तग़ज़्ज़ुल, न ग़ज़ल की ख़ुशबू बस लगा रहता हूँ मैं क़ाफ़िया-पैमाई में सीख पानी से हुनर काम 'अनीस' आएगा दौड़ कर ख़ुद ही चला आता है गहराई में — Anis shah anis
इश्क़ वालों को बुरा कहना भी हुस्न वालों की पज़ीराई है — Saarthi Baidyanath
उस ने आगाज़-ए-पज़ीराई किया है ऐसे और ठहरने को नहीं करता है दिल अब मेरा — shampa andaliib
मुड़ के भी देखा नहीं जाते हुए उस ने हमें रह गई होगी कमी कोई पज़ीराई में — Pravendra Anuragi

पज़ीर नए अनुभवों और विचारों के प्रति खुलापन दर्शाता है। कविता में, यह एक ऐसे दिल का सुझाव देता है जो अज्ञात को गले लगाने के लिए तैयार है, एक ऐसा मन जो दुनिया की सुंदरता को आत्मसात करने के लिए तैयार है।

कवि पज़ीर का उपयोग किसी पात्र की वृद्धि या परिवर्तन को दर्शाने के लिए करते हैं। यह अज्ञानता से ज्ञान की यात्रा या प्रेम और परिवर्तन की स्वीकृति को चित्रित कर सकता है।

पज़ीर एक खुले दिल और दिमाग की सुंदरता को दर्शाता है, जो जीवन के चमत्कारों का स्वागत करने के लिए हमेशा तैयार रहता है।