Meaning of

फ़ख़्र

fakhr • فخر

गर्व; सम्मान; प्रतिष्ठा

pride; honor; dignity

فخر; عزت; وقار

Arabic

उठाना ख़ुद ही पड़ता है थका टूटा बदन 'फ़ख़री' कि जब तक साँस चलती है कोई कंधा नहीं देता — Zahid Fakhri
सभी का सर यहाँ है फ़ख़्र से ऊँचा मिरे भाई वतन जो क़ैद था पहले अभी आज़ाद है प्यारे — Faizan Faizi
तुझे नाज़ है कि तू हुस्न है तेरी इस जहाँ में मिसाल क्या मुझे फ़ख़्र है कि मैं इश्क़ हूँ तुझे पा न लूँ तो कमाल क्या — Nityanand Vajpayee
कितनी दिलकश है चूमने की अदा तेरे होंठों पे फ़ख़्र है मुझ को — Ramnath Shodharthi
हमें ये फ़ख़्र है तुम आसमाँ के तारे हो मगर अब कह नहीं सकते कि तुम हमारे हो — Saarthi Baidyanath
फ़ख़्र से कह सकता हूँ मैं ने एक सितारे को छू रक्खा है हाँ-हाँ वही-वही जिस को तुम अपने काँधे का तिल कहती हो — Intzar Akhtar
ईमानदार ख़ुद को न कहिए यूँँ बार-बार लगता है फ़ख़्र कम है ज़्यादा मलाल है — Ramnath Shodharthi
बात अब क्या ही करे हालात पर फ़ख़्र उस के है मुझे जज़्बात पर — Manohar Shimpi

'फ़ख़्र' शब्द गर्व और प्रतिष्ठा की भावना को व्यक्त करता है, जो अक्सर व्यक्तिगत उपलब्धियों या कुलीन वंश से जुड़ा होता है। कविता में, इसका उपयोग गर्व के सकारात्मक पहलुओं और अहंकार की संभावित खामियों को व्यक्त करने के लिए किया जाता है, जो मानव भावना की एक सूक्ष्म खोज बनाता है।

कवि 'फ़ख़्र' का उपयोग आत्म-मूल्य और पहचान के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह उपलब्धियों का जश्न मनाने या गर्व की व्यर्थता की आलोचना करने वाले छंदों में प्रकट होता है।

कविता में, 'फ़ख़्र' गर्व और विनम्रता के बीच के नाजुक संतुलन को दर्शाता है। यह आत्म-सम्मान की प्रकृति पर विचार करने के लिए आमंत्रित करता है।