Meaning of

बे-ख़बर

be-KHabar • بے خبر

अनजान; बेख़बर

unaware; ignorant

لا علم; بے خبر

Persian

रूहों के पर्दा-पोश गुनाहों से बे-ख़बर जिस्मों की नेकियाँ ही गिनाता रहा हूँ मैं — Jaun Elia
वो तिरे नसीब की बारिशें किसी और छत पे बरस गईं दिल-ए-बे-ख़बर मिरी बात सुन उसे भूल जा उसे भूल जा — Amjad Islam Amjad
रक़्स करना है तो फिर होश की पाज़ेब उतार आलम-ए-वज्द में ही बे-ख़बरी आती है — Rajesh Reddy
ये सोचना ग़लत है कि तुम पर नज़र नहीं मसरूफ़ हम बहुत हैं मगर बे-ख़बर नहीं — Aalok Shrivastav
दिलों को तेरे तबस्सुम की याद यूँँ आई कि जगमगा उठें जिस तरह मंदिरों में चराग़ — Firaq Gorakhpuri
वो बे-ख़बर है,बादलों ने उस का घर डुबो दिया किसान राह तकता रह गया बिचारा खेत पर — Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"

बेख़बर शब्द मासूमियत या भोलेपन का भाव जगाता है, अक्सर ऐसे व्यक्ति के लिए प्रयोग होता है जो अपने आसपास की जटिलताओं से अनजान होता है। कविता में, यह जीवन की कठोर सच्चाइयों से अछूते, एक शुद्ध, अप्रभावित अस्तित्व की स्थिति का संकेत दे सकता है।

कवि अक्सर 'बेख़बर' का उपयोग युवावस्था की मासूमियत और उम्र की बुद्धिमत्ता के बीच विरोधाभास दिखाने के लिए करते हैं। यह अज्ञानता में मिलने वाले आनंद या दुनिया के बोझ को न जानने में मिलने वाली शांति को भी उजागर कर सकता है।

अपने काव्यात्मक सार में, 'बेख़बर' मासूमियत और अनुभव के बीच के नाज़ुक संतुलन को पकड़ता है।