ख़ुद से हो बे-ख़बर दर दर भटकते हैंऐसे फ़कीर हम जो घर भटकते हैंख़ुद से मिला करो कोई बहाने सेख़ुद-आगही के कारण डर भटकते हैं— Shubham Rai 'shubh'