Meaning of

भंवर

bhanwar • بھنور

भंवर; चक्रवात; उलझन

whirlpool; vortex; confusion

بھنور; گرداب; الجھن

Sanskrit

दो क़ातिल देखे फूलों ने
इक माली में इक भँवरे में

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भँवर से कैसे बच पाया किसी पतवार से पूछो
हमारा हौसला पूछो, तो फिर मँझधार से पूछो

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दिया जला के सभी बाम-ओ-दर में रखते हैं
और एक हम हैं इसे रह-गुज़र में रखते हैं

समुंदरों को भी मालूम है हमारा मिज़ाज
कि हम तो पहला क़दम ही भँवर में रखते हैं

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बीच भँवर से कश्ती कैसे बच निकली
बहुत दिनों तक दरिया भी हैरान रहा

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हम ने तुझ पे छोड़ दिया है
कश्ती, दरिया, भँवर, किनारा

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इक गुल को हाथों से छू कर उस ने
भँवरों के होंठ गुलाबी कर डाले

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मैं वो दरिया हूँ कि हर बूँद भँवर है जिस की
तुम ने अच्छा ही किया मुझ से किनारा कर के

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लब-ए-दरिया पे देख आ कर तमाशा आज होली का
भँवर काले के दफ़ बाजे है मौज ऐ यार पानी में

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सफ़ीने को किनारे से भँवर इक मोड़ देती है
हवा जब तेज़ चलती है इमारत तोड़ देती है

मुहब्बत सात पर्दों में जिगर महफ़ूज़ रखती है
क़ज़ा जब चिलचिलाती है तो पर्दें तोड़ देती है

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मेरे अपने अंदर एक भँवर था जिस में
मेरा सब कुछ साथ ही मेरे डूब गया है

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दो क़ातिल देखे फूलों ने
इक माली में इक भँवरे में

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भँवर से कैसे बच पाया किसी पतवार से पूछो
हमारा हौसला पूछो, तो फिर मँझधार से पूछो

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मूल रूप से, 'भंवर' का अर्थ पानी की घूमती हुई धारा है, जो अराजकता और गति का प्राकृतिक दृश्य है। कविता में, यह उथल-पुथल भरी भावनाओं और मानव अनुभव की आंतरिक उथल-पुथल को दर्शाता है।

कवि 'भंवर' का उपयोग भावनात्मक अराजकता, एक परेशान मन के घूमते विचारों, या भाग्य की अप्रत्याशित प्रकृति को दर्शाने के लिए करते हैं। यह अक्सर शांति के विपरीत होता है, आंतरिक संघर्ष को उजागर करता है।

काव्यिक क्षेत्र में, 'भंवर' आंतरिक तूफान का प्रतीक है, जीवन की अप्रत्याशित धाराओं का जीवंत चित्रण।