Meaning of

मख़्लूक

makhlook • مخلوق

जीव; सृष्टि; प्राणी

creature; creation; beings

مخلوق; تخلیق; مخلوقات

Arabic

अशरफ़-उल-मख़्लूक़ आख़िर क्यूँ कहें इंसान को हम
जब है फ़रमान-ए-ख़ुदा, बेशक ख़सारे में है इंसाँ

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कहते हैं ऐ इंसान तू अशरफ़-उल-मख़्लूक़ात है
ढूँढ़ आख़िर तुझ में भला कौन सी ऐसी बात है

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मिटता रहा बदन हस्ती कब रही किसी की
साँसें न लड़ सकीं तो मख़्लूक छोड़ आया

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मेरी जब भी कोई बात सँवरने लगती है
मसलन किस्मत को ये बात खटकने लगती है

ये सब कुछ वीराना सा है तेरे जाने से
तेरे आने से मख़्लूक़ चहकने लगती है

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दुखा के दिल शजर मख़्लूक़-ए-रब का
नमाज़ें पढ़ने से क्या फ़ाइदा है

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अशरफ़-उल-मख़्लूक़ आख़िर क्यूँ कहें इंसान को हम
जब है फ़रमान-ए-ख़ुदा, बेशक ख़सारे में है इंसाँ

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कहते हैं ऐ इंसान तू अशरफ़-उल-मख़्लूक़ात है
ढूँढ़ आख़िर तुझ में भला कौन सी ऐसी बात है

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'मख़्लूक' शब्द सभी जीवित प्राणियों को समेटे हुए है, सृष्टि की विविधता और जटिलता को उजागर करता है। कविता में, यह अक्सर जीवन की परस्पर संबंधिता पर आश्चर्य और चिंतन का भाव उत्पन्न करता है।

कवि 'मख़्लूक' का उपयोग अस्तित्व के विषयों, विविधता की सुंदरता, और जीवन के नाजुक संतुलन की खोज के लिए करते हैं। यह सृष्टि के विशाल ताने-बाने में मानवता के स्थान की याद दिलाता है।

काव्यात्मक परिदृश्य में, 'मख़्लूक' जीवन के जटिल जाल का उत्सव है, विविधता में एकता का सम्मान करने का आह्वान है।