Meaning of

मज़ार

mazaar • مزار

कब्र; दरगाह; मकबरा

tomb; shrine; mausoleum

قبر; درگاہ; مقبرہ

Arabic

उम्मत ने ज़ुल्म ढाया ये आल-ए-रसूल पर
साया तलक ना छोड़ा मज़ार-ए-बतूल पर

चारों तरफ़ है फैली मदीने में रौशनी
पर तीरगी है आज भी क़ब्र-ए-बतूल पर

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नींद भी जागती रही पूरे हुए न ख़्वाब भी
सुब्ह हुई ज़मीन पर रात ढली मज़ार में

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मेरे संग-ए-मज़ार पर फ़रहाद
रख के तेशा कहे है या उस्ताद

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यहाँ दाग़-दार और भी हैं
हैं हम तेरे यार और भी हैं

बुझा इक चराग़ ख़ुश नहीं हो
चराग़-ए-मज़ार और भी हैं

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मुनाफ़िक़ के चेले किए जा रहे हैं
अजब कारना
में किए जा रहे हैं

नमाज़ें तो इनसे अदा हो न पाई
मज़ारों पे सज़दे किए जा रहे हैं

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सर्द मौसम में ठिठुरते हुए जिस्मों के लिए
चादरें क्यूँँ न मजारों से उठा ली जाए

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मकाँ है क़ब्र जिसे लोग ख़ुद बनाते हैं
मैं अपने घर में हूँ या मैं किसी मज़ार में हूँ

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मैं बीच में हूँ तेरे ग़म को छोडूं तो ये लगता है
कि पीछे मेरा शव है आगे मेरी ही मज़ार है

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क्यूँँ रोऊँ बे वजह मैं तुझे याद क्यूँँ करूँँ
ख़ुद को तेरे फिराक़ में बर्बाद क्यूँँ करूँँ

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लगता है उस ने मान ली है अब बड़ों की बात
मेरी मज़ार पर नहीं आती वो आजकल

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उम्मत ने ज़ुल्म ढाया ये आल-ए-रसूल पर
साया तलक ना छोड़ा मज़ार-ए-बतूल पर

चारों तरफ़ है फैली मदीने में रौशनी
पर तीरगी है आज भी क़ब्र-ए-बतूल पर

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नींद भी जागती रही पूरे हुए न ख़्वाब भी
सुब्ह हुई ज़मीन पर रात ढली मज़ार में

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मज़ार, departed आत्माओं के लिए विश्राम स्थल, एक गंभीर शांति को धारण करता है। कविता में, यह एक ऐसा स्थान बन जाता है जहाँ यादें ठहरती हैं, नश्वर और शाश्वत के बीच एक पुल।

कवि अक्सर 'मज़ार' का उपयोग स्मृति और विरासत के विषयों को खोजने के लिए करते हैं। यह अतीत की स्थायी उपस्थिति का रूपक है, एक स्थान जहाँ समय स्थिर रहता है।

एक मज़ार की शांति में, कवि अनंतता की गूंज पाते हैं।