Meaning of

मन्ज़र

manzar • منظر

दृश्य; नज़ारा; दृश्यावली

scene; view; spectacle

منظر; نظارہ; تماشا

Arabic

थोड़ा सा अक्स चाँद के पैकर में डाल दे
तू आ के जान रात के मंज़र में डाल दे

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निगाहों के तक़ाज़े चैन से मरने नहीं देते
यहाँ मंज़र ही ऐसे हैं कि दिल भरने नहीं देते

हमीं उन से उमीदें आसमाँ छूने की करते हैं
हमीं बच्चों को अपने फ़ैसले करने नहीं देते

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नई नई आँखें हों तो हर मंज़र अच्छा लगता है
कुछ दिन शहर में घू
में लेकिन अब घर अच्छा लगता है

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मुझ से अब लोग कम ही मिलते हैं
यूँँ भी मैं हट गया हूँ मंज़र से

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काश ऐसा कोई मंज़र होता
मेरे काँधे पे तेरा सर होता

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जिस शाने पर सर रखते हो उस शाने पर सो जाते हो
जाने कैसे दीदावर हो हर मंज़र में खो जाते हो

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तुझे कुछ याद भी है क्या मिरा उस रात में आना
छतों से कूदकर के फिर भरी बरसात में आना

कई मंज़र बने ख़ंजर चुभे मेरी निगाहों में
मुझे मिलने को पर तेरा किसी के साथ में आना

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जैसा मूड हो वैसा मंज़र होता है
मौसम तो इंसान के अंदर होता है

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कैसे मंज़र सामने आने लगे हैं
गाते गाते लोग चिल्लाने लगे हैं

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छोड़ कर जाने का मंज़र याद है
हर सितम तेरा सितमगर याद है

अपना बचपन भूल बैठा हूँ मगर
अब भी तेरा रोल नंबर याद है

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थोड़ा सा अक्स चाँद के पैकर में डाल दे
तू आ के जान रात के मंज़र में डाल दे

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निगाहों के तक़ाज़े चैन से मरने नहीं देते
यहाँ मंज़र ही ऐसे हैं कि दिल भरने नहीं देते

हमीं उन से उमीदें आसमाँ छूने की करते हैं
हमीं बच्चों को अपने फ़ैसले करने नहीं देते

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मूल रूप से 'मन्ज़र' का अर्थ दृश्य या नज़ारा है, जो आँखों से देखा जाता है। कविता में, यह दृश्य की सुंदरता या वीरानी से जुड़े भावनाओं को जगाता है, जो अक्सर देखने वाले की आंतरिक स्थिति को दर्शाता है।

'मन्ज़र' का उपयोग कवि बाहरी और आंतरिक परिदृश्यों को चित्रित करने के लिए करते हैं। यह सूर्यास्त की शांति या तूफान के अराजकता को दर्शा सकता है। अक्सर, यह आत्मा के परिदृश्य का दर्पण बनता है।

'मन्ज़र' देखे और महसूस किए गए सार को पकड़ता है, बाहरी दुनिया और आंतरिक भावनाओं के बीच की खाई को पाटता है।