Meaning of

मर्द-ए-हक़

mard-e-haq • مرد حق

सत्य का व्यक्ति; न्याय का खोजी

man of truth; seeker of justice

سچ کا آدمی; انصاف کا متلاشی

Persian

लोग कहते हैं बदलता है ज़माना सब को मर्द वो हैं जो ज़माने को बदल देते हैं — Akbar Allahabadi
मैं ज़ीस्त में अपनी कभी ख़ुद ग़र्ज तो होता नहीं जो चाहिए दुनिया को मैं जो मर्द वो होता नहीं — Manoj Devdutt

यह वाक्यांश उस व्यक्ति की छवि प्रस्तुत करता है जो सत्य और न्याय के लिए अडिग खड़ा रहता है। कविता में, यह अक्सर ईमानदारी और नैतिक शक्ति का प्रतीक होता है, जो अराजकता की दुनिया में धर्म का प्रकाशस्तंभ है।

कवि इस शब्द का उपयोग उन पात्रों को उजागर करने के लिए करते हैं जो सत्य और न्याय का प्रतीक होते हैं। यह धोखे और भ्रष्टाचार के पात्रों के विपरीत होता है, और नैतिक दिशा-निर्देश के रूप में कार्य करता है। अक्सर महाकाव्य कथाओं या नैतिक कहानियों में प्रयुक्त होता है।

मर्द-ए-हक़ ईमानदारी का एक शाश्वत प्रतीक है। यह हमें सत्य की स्थायी शक्ति की याद दिलाता है।