log kahte hain badalta hai zamaana sab ko | लोग कहते हैं बदलता है ज़माना सब को

  - Akbar Allahabadi

लोग कहते हैं बदलता है ज़माना सब को
मर्द वो हैं जो ज़माने को बदल देते हैं

  - Akbar Allahabadi

Aadmi Shayari

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    ज़िंदगानी का मज़ा मिलता था जिन की बज़्म में
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    पुख़्ता तबओं पर हवादिस का नहीं होता असर
    कोहसारों में निशान-ए-नक़्श-ए-पा मिलता नहीं

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    बे-भजन गाए तो मंदिर से टिका मिलता नहीं

    जिस पे दिल आया है वो शीरीं-अदा मिलता नहीं
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    शाह सब बस्ते हैं याँ कोई गदा मिलता नहीं

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    शुक्र की जा है अगर हाजत-रवा मिलता नहीं

    चाँदनी रातें बहार अपनी दिखाती हैं तो क्या
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    मानी-ए-दिल का करे इज़हार 'अकबर' किस तरह
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    Akbar Allahabadi
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    जान देने को हूँ मौजूद कोई बात तो हो

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    किसी जानिब से कुछ इज़हार-ए-करामात तो हो

    दिल-कुशा बादा-ए-साफ़ी का किसे ज़ौक़ नहीं
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    Akbar Allahabadi
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    वाइज़ की बात रह गई साक़ी की चल गई

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