Meaning of

मसरूफि़यत

masroofiyat • مصروفیت

व्यस्तता; कामकाज; संलग्नता

busyness; occupation; engagement

مصروفیت; کام کاج; مشغولیت

Arabic

कोई मसरूफ़ियत होगी तुम्हारी हमें तो तुम सेे ही फ़ुर्सत नहीं है — Saurabh Mehta 'Alfaaz'
अपनी मसरूफियत पे लानत है अब तो नंबर भी उस का याद नहीं — Faiz Ahmad
मसअला मसरूफ़ियत और वक़्त की क़िल्लत नहीं किस को दें तरजीह कितनी ये फ़साना है मगर — A R Sahil "Aleeg"
है वही कश्ती पुरानी है वही दरिया मेरा जिस पे तू आने न पाया है वही रस्ता मेरा मैं मिरी मसरूफ़ियत से तंग आ जाता हूँ दोस्त मुझ को सीने से लगा के वक़्त कर ज़ाया' मेरा अपनी वहशत का तक़ाज़ा ढूंढता हूँ दर-ब-दर ले गया है कोहकन जिस रोज़ से तेशा मेरा याद कर कूचा-नवर्दी,याद कर उल्फ़त के दिन याद कर बातें मेरी और याद कर चेहरा मेरा जब हवाएँ थक गईं थीं कोशिशें कर दश्त में रेत तब रक्साँ हुई थी चूम कर साया मेरा बारिशों को मौसमों का खेल सब कहते हैं पर रो पड़े थे अब्र-पारे जान कर क़िस्सा मेरा आँख वो हँसती रही तो खिल उठे सूखे गुलाब आँख वो रोने लगी तो रो पड़ा सहरा मेरा ख़ुसरवान-ए-शहर मैं हो जाऊँगा इक लम्स से और फ़क़त इक दीद से भर जाएगा कासा मेरा मैं किताबों के जहाँ का एक ख़ुशक़िस्मत किताब नाव बच्चों ने बनाया फाड़ कर सफ़्हा मेरा उस नज़र को ख़्वाहिशों का शौक़ दे मेरा ख़याल उस जबीं को रौशनी देता रहे बोसा मेरा मैं मुसलसल बंद करता हूँ मगर फिर दम-ब-दम याद उस की खोलती जाती है दरवाज़ा मेरा — Prasoon
मसरूफ़ियत में ख़्वाब बन आए है वो महबूब तो चंचल बड़ा ही है मिरा — Abha sethi
मसरूफ़ियत में ही मिली आख़िर ख़ुशी हमें फ़ुर्सत मिली तो याद फिर आने लगे हैं ग़म — Shriyansh Qaabiz
तुम क्यूँ नहीं समझते मसरूफ़ियत मिरी बेकार बैठना भी तो कार ही हुआ — Lekhak Suyash
इश्क़ जज़्बा और मेरी मसरूफ़ियत देख तू जो मिल जाए फिर मेरी हैसियत देख — Rahul Patel
ओढ़ कर मसरूफि़यत आ तो गए हैं देखना है ज़िन्दगी रोकेगी कब तक — Aqib khan
इतनी तो मसरूफ़ियत देखी नहीं थी चलते चलते पूछते हैं तुम कहाँ हो — Meem Alif Shaz

'मसरूफि़यत' शब्द विभिन्न कार्यों में व्यस्त या संलग्न होने की स्थिति को दर्शाता है। यह कर्तव्यों और जिम्मेदारियों से भरी हुई जीवनशैली का संकेत देता है, जो अक्सर अवकाश या चिंतन के लिए कम जगह छोड़ती है। कविता में, यह आधुनिक जीवन की निरंतर गति और स्थिरता के क्षणों की लालसा का प्रतीक हो सकता है।

कवि 'मसरूफि़यत' का उपयोग समाज की मांगों की आलोचना करने के लिए करते हैं, जो व्यक्तियों को आत्मनिरीक्षण से दूर खींचती हैं। यह एकांत और चिंतन के विषयों के विपरीत होता है।

काव्यात्मक परिदृश्य में, 'मसरूफि़यत' जीवन की अनवरत मांगों की याद दिलाता है। यह कर्तव्य और आत्मा की शांत आवश्यकताओं के बीच संतुलन पर चिंतन के लिए आमंत्रित करता है।