Meaning of

मिज़गाँ

mizgaan • مژگاں

पलकों; आँखों की किनारी

eyelashes; fringes of the eyes

پلکیں; آنکھوں کی کنارے

Persian

नहीं उतरा है कब से एक क़तरा भी बयाबाँ में
कि ख़ुश्की फैलती ही जा रही है दूर मिज़्गाँ में

दिखें बहती अगर आँखें यूँँ करना बहने देना तुम
बहुत मुश्किल से आती है रवानी चश्म-ए-वीराँ में

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किन नींदों अब तू सोती है ऐ चश्म-ए-गिर्या-नाक
मिज़्गाँ तो खोल शहर को सैलाब ले गया

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रौशनी कमरे में मेरे देर तक ठहरी रही
जब उठी मिज़गाँ तो इक सूरज मेरे पहलू में था

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इश्क़ में वैसे नामुमकिन है चश्म-ए-मिज़्गाँ पाए सुकूँ
कुछ ख़्वाबों को बुन लूँ मैं भी नींद अगर आ जाए तो

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नहीं उतरा है कब से एक क़तरा भी बयाबाँ में
कि ख़ुश्की फैलती ही जा रही है दूर मिज़्गाँ में

दिखें बहती अगर आँखें यूँँ करना बहने देना तुम
बहुत मुश्किल से आती है रवानी चश्म-ए-वीराँ में

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किन नींदों अब तू सोती है ऐ चश्म-ए-गिर्या-नाक
मिज़्गाँ तो खोल शहर को सैलाब ले गया

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मूल रूप में, 'मिज़गाँ' आँखों की नाज़ुक, सुरक्षात्मक किनारी को दर्शाता है। कविता में, ये पलकें सुंदरता, रहस्य और आँखों की मौन भाषा के प्रतीक बन जाती हैं। इनमें बिना शब्दों के भावनाओं को व्यक्त करने की शक्ति होती है।

कवि अक्सर 'मिज़गाँ' का उपयोग प्रिय की दृष्टि के मौन आकर्षण को व्यक्त करने के लिए करते हैं। पलकें एक घूंघट बन जाती हैं, जो रहस्यों या भावनाओं को छुपाती हैं। इन्हें प्रेम के हथियार के रूप में भी चित्रित किया जाता है, जो मात्र एक झपकी से दिलों को भेद सकती हैं।

मिज़गाँ आँखों की मौन वाक्पटुता को पकड़ता है, अव्यक्त सुंदरता की शक्ति का प्रमाण।