Meaning of

मिश्अल

mish'al • مشعل

मशाल; प्रकाशस्तंभ

torch; beacon

مشعل; روشنی کا مینار

Arabic

तड़पना हिज्र तक सीमित नहीं है उसे दुल्हन भी बनते देखना है — Anand Verma
उस ने पूछा कैसे मुमकिन है मेरे दिल तक जाना मैं ने कहा तुम उर्दू सीखो रस्ता बनते जाना है — Haider Khan
बड़े गुस्ताख़ निकले तुम मेरी उम्मीद से ज़्यादा मेरी ही दी मशालों से मेरा ही घर जलाते हो — Nityanand Vajpayee
है ज़रूरी शाइरों की आँख में आँसू रहे खिलखिलाने से हमारे दिन नहीं बनते मियाँ — Anas Khan
तुम्हें पता है मिरे हाथ की लकीरों में तुम्हारे नाम के सारे हुरूफ़ बनते हैं — Fareeha Naqvi
तू मुझे बनते बिगड़ते हुए अब ग़ौर से देख वक़्त कल चाक पे रहने दे न रहने दे मुझे — Khursheed Rizvi
अगर ख़ुदा बनते पत्थर को तराश के फिर तो हर इंसान ख़ुदा का ख़ुदा होता — Meenakshi Masoom
इक कहानी की थी माँग ऐसी उस में बस दो ही किरदार बनते — Abhay Aadiv
तुम ने मुझ को क्या समझा जो छोड़ दिया ईंट नहीं थीं तब भी घर तो बनते थे — Divyansh "Dard" Akbarabadi

'मिश्अल' शब्द अंधकार में मार्गदर्शन करने वाले प्रकाश की छवि प्रस्तुत करता है। अपने मूल अर्थ में, यह एक मशाल का प्रतिनिधित्व करता है जो आगे का मार्ग रोशन करता है। समय के साथ, कविता ने इस शब्द को आशा और मार्गदर्शन के प्रतीक के रूप में अपनाया है, एक प्रकाशस्तंभ जो आत्मा को अनिश्चितता की छायाओं से बाहर निकालता है।

कवि अक्सर 'मिश्अल' का उपयोग प्रबोधन और आशा के विषयों को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह आंतरिक शक्ति और दृढ़ता के लिए एक रूपक के रूप में कार्य करता है। यह शब्द अंधकार के विपरीत है, निराशा पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है।

'मिश्अल' कविता में प्रकाश की स्थायी शक्ति का प्रमाण है। यह हमें याद दिलाता है कि सबसे अंधेरे समय में भी, एक अकेली मशाल हमें आगे बढ़ा सकती है।