Meaning of

रब्ब

rabb • رب

स्वामी; मालिक; देवता

lord; master; deity

مالک; رب; خدا

Arabic

लोग हम सेे सीखते हैं ग़म छुपाने का हुनर
आओ तुम को भी सिखा दें मुस्कुराने का हुनर

क्या ग़ज़ब है तजरबे की भेंट तुम ही चढ़ गए
तुम से ही सीखा था हम ने दिल दुखाने का हुनर

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उस लड़की से बस अब इतना रिश्ता है
मिल जाए तो बात वगैरा करती है

बारिश मेरे रब की ऐसी नेमत है
रोने में आसानी पैदा करती है

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नाम पे हम क़ुर्बान थे उस के लेकिन फिर ये तौर हुआ
उस को देख के रुक जाना भी सब से बड़ी क़ुर्बानी थी

मुझ से बिछड़ कर भी वो लड़की कितनी ख़ुश ख़ुश रहती है
उस लड़की ने मुझ से बिछड़ कर मर जाने की ठानी थी

183

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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी
आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी

हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं
ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी

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तुम मोहब्बत को खेल कहते हो
हम ने बर्बाद ज़िंदगी कर ली

135

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उन के गेसू खुलें तो यार बने बात मेरी
इक रबर बैंड ने जकड़ी हुई है रात मेरी

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न सहम कर न डर के छोड़ता है
हंस तालाब मर के छोड़ता है

वक़्त बर्बाद करने वालों को
वक़्त, बर्बाद कर के छोड़ता है

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काम आया तिरंगा कफ़न के लिए
कोई क़ुर्बां हुआ था वतन के लिए

सोचो क्या कर लिया तुम ने जी कर के दोस्त
नस भी काटी तो बस इक बदन के लिए

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पर्वतों को ज़ख़्म गहरे दे दिए हैं
पानियों से पत्थरों पर वार कर के

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अब मैं समझा तिरे रुख़्सार पे तिल का मतलब
दौलत-ए-हुस्न पे दरबान बिठा रक्खा है

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लोग हम सेे सीखते हैं ग़म छुपाने का हुनर
आओ तुम को भी सिखा दें मुस्कुराने का हुनर

क्या ग़ज़ब है तजरबे की भेंट तुम ही चढ़ गए
तुम से ही सीखा था हम ने दिल दुखाने का हुनर

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उस लड़की से बस अब इतना रिश्ता है
मिल जाए तो बात वगैरा करती है

बारिश मेरे रब की ऐसी नेमत है
रोने में आसानी पैदा करती है

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'रब्ब' शब्द दिव्य अधिकार और सुरक्षा की भावना को जागृत करता है। कविता में, यह अक्सर अंतिम संरक्षक का प्रतीक होता है, एक श्रद्धा और विश्वास का पात्र। 'रब्ब' की भावनात्मक गहराई इसकी शक्ति और करुणा को व्यक्त करने की क्षमता में निहित है, एक मार्गदर्शक शक्ति जो भय और प्रेम दोनों का कारण बनती है।

कवि अक्सर 'रब्ब' का उपयोग दिव्य हस्तक्षेप या मार्गदर्शन की लालसा व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह सांत्वना और शक्ति के अंतिम स्रोत का प्रतीक हो सकता है। यह शब्द मानव दुर्बलता और दिव्य सर्वशक्तिमानता के बीच विरोधाभास भी दर्शा सकता है।

कविता में, 'रब्ब' नश्वर और दिव्य के बीच एक पुल बन जाता है, एक ऐसा शब्द जो भय और आशा दोनों का भार धारण करता है।