Meaning of

रश्क़

rasq • رشک

ईर्ष्या; प्रशंसा

envy; admiration

رشک; تعریف

Arabic

धमका के बोसे लूँगा रुख़-ए-रश्क-ए-माह का चंदा वसूल होता है साहब दबाव से — Akbar Allahabadi
शायद आ जाए कभी देखने वो रश्क-ए-मसीह मैं किसी और से इस वास्ते अच्छा न हुआ — Anwar Taban
उस चाँद को भी रश्क होता था उसी को देख कर मैं भी खुले आकाश में तस्वीर उस की चूमता — Ankit Yadav
रश्क़ होता है चूमते हैं गाल तेरे झुमके रक़ीब हैं मेरे — Upendra Bajpai
करने लगें सब रश्क यूँँ मत इस तरह कर इश्क़ तू — Sohit Singla
मेरे रश्क-ए-क़मर तू ने पहली नज़र जब नज़र से मिलाई मज़ा आ गया बर्क़ सी गिर गई काम ही कर गई आग ऐसी लगाई मज़ा आ गया — Fana Bulandshahri
रश्क़ अपने ही सुख़न से क्यूँ नहीं होगा मुझे वो मुहब्बत मुझ सेे नइँ मेरे सुख़न से कर रही — RAAHI
है मुझ को रश्क़ तेरी पाँव की पायल से इतना यूँँ लिपट कर पाँव से तेरे ये इतना नाचती क्यूँँ है — anupam shah
तुम्हारे कान के झुमके से मुझ को रश्क़ ऐसे है कभी गर्दन को छूता है कभी गालों को चू में है — anupam shah
अब अकेला घर ही मुझ को प्यार करता है कोई आए रश्क में तकरार करता है — arjun chamoli

मूल रूप से 'रश्क़' ईर्ष्या का भाव व्यक्त करता है, जिसमें प्रशंसा की झलक होती है। कविता में यह लालसा और इच्छा की जटिल भावनाओं को पकड़ता है, जहाँ प्रशंसा और ईर्ष्या आपस में मिल जाती हैं।

कवि अक्सर 'रश्क़' का उपयोग भावनाओं की द्वैतता को खोजने के लिए करते हैं, जहाँ किसी की सुंदरता या सफलता की प्रशंसा ईर्ष्या से छाया होती है। यह मानव हृदय की प्रशंसा और लालसा की क्षमता को दर्शाता है।

कविता के क्षेत्र में, 'रश्क़' प्रशंसा और ईर्ष्या के बीच के नाजुक संतुलन को प्रकट करता है, हमें अपनी इच्छाओं पर विचार करने के लिए आमंत्रित करता है।