Meaning of

रिवायात

rivaayat • روایات

परंपराएँ; रिवाज

traditions; customs

روایات; رسوم

Arabic

ये रिवायत कोई बदल न सका
सच भी तन्हा है इश्क़ भी तन्हा

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दिल लगा के दगा हम नहीं करते हैं
बेवफाई हमारी रिवायत नहीं

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इक रिवायत थी निभानी सो निभा दी मैं ने
छोड़ कर जाते हुए ख़ूब दुआ दी मैं ने

उस को बस इतना ही कह पाया कि ख़ुश रहना और
दिल की दीवार से तस्वीर हटा दी मैं ने

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लाखों रवायत तोड़ कर निकला था उस की आँख से
उस मर्द की आँखों का आँसू झूठ हो सकता नहीं

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हमें मालूम नहीं था ये मुसीबत है
हमें ये इल्म नहीं था की रिवायत है

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सपने गए सुकून भी उल्फ़त चली गई
मिलने की अपने आप से फ़ुर्सत चली गई

मेरी तो बोलने की ही आदत चली गई
तेरे ही साथ सारी शरारत चली गई

खुशियांँ थीं उस सेे घर में थीं आंँगन में रौनकें
बिटिया के साथ घर की भी बरकत चली गई

छूटा तुम्हारा साथ तो बाक़ी ही क्या बचा
दिल में जो पल रही थी वो हसरत चली गई

आते नहीं फ़क़ीर न साइल भी आजकल
माँ क्या गई कि घर की रिवायत चली गई

मेरे सुख़न पे तू ने उठाईं जो उँगलियाँ
मेरी तमाम उम्र की मेहनत चली गई

यूँँंँ भी कभी जहान में इफ़रात में न थी
थोड़ी बहुत थी वो भी सदाक़त चली गई

होती नहीं है शे'र की आमद भी अब नज़र
तुम क्या गए कि लफ़्ज़ की ताक़त चली गई

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मुझे मिलने जो आते हो रिवायत भूल जाते हो
कभी आशिक़ को लाते हो कभी भूले से आते हो

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बुजुर्गों की रिवायत अब सँभालो तुम
हुई है उम्र 'साहिल' वक़्त-ए-रूख़्सत है

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चलो माना रिवायत थी दिलों को तोड़ने की
मगर तुम तो रिवायत मानने वाले नहीं थे

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एक दूजे से जो शिकायत है
वो 'अदावत नहीं रिवायत है

ज़िन्दगी है तो मस'अले भी हैं
बिन मसाइल तो ये हिकायत है

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ये रिवायत कोई बदल न सका
सच भी तन्हा है इश्क़ भी तन्हा

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दिल लगा के दगा हम नहीं करते हैं
बेवफाई हमारी रिवायत नहीं

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'रिवायात' शब्द इतिहास के भार और सांस्कृतिक प्रथाओं की निरंतरता को दर्शाता है। यह लोगों की सामूहिक स्मृति, पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं की बात करता है। कविता में, यह अक्सर अतीत की लालसा, या मानव अनुभव की स्थायी प्रकृति पर एक चिंतन का आभास देता है।

कवि 'रिवायात' का उपयोग विरासत और पहचान के विषयों का पता लगाने के लिए करते हैं। यह अक्सर आधुनिकता के विपरीत होता है, परिवर्तन और परंपरा के बीच तनाव को उजागर करता है। यह शब्द पारिवारिक बंधनों की गर्मजोशी या प्राचीन अनुष्ठानों की गंभीरता का आभास दे सकता है।

अपने काव्यात्मक सार में, 'रिवायात' अतीत और वर्तमान के बीच एक पुल है, संस्कृति की स्थायी भावना का प्रमाण है।