Meaning of

लफ़्ज़-ए-मोहब्बत

lafz-e-mohabbat • لفظ محبت

प्रेम का शब्द; स्नेह की अभिव्यक्ति

word of love; expression of affection

محبت کا لفظ; محبت کا اظہار

Arabic

ज़बाँ पे सबके है लफ्ज़-ए-मोहब्बत
निभाने वाला पर कोई नहीं है

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इक लफ़्ज़-ए-मोहब्बत का अदना ये फ़साना है
सिमटे तो दिल-ए-आशिक़ फैले तो ज़माना है

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आज लफ़्ज़-ए-मोहब्बत फ़साना हुआ
तुझ को देखे भी अब तो ज़माना हुआ

हम को सहरा-नवर्दी मिली इश्क़ में
अहले दिल का कोई कब ठिकाना हुआ

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चारा-गर ने मिरी जब ग़ौर से देखी हालत
कहा अल्लाह किसी की न हो ऐसी हालत

अब तो काँप उठता हूँ मैं लफ़्ज़-ए-मोहब्बत से भी
एक लड़की ने करी है मिरी ऐसी हालत

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यूँँ तो व्याकुल है हम से बात करने को वो
लेकिन लफ़्ज़ मुहब्बत के मिलते नइँ उस को

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न ला लफ्ज़-ए-मोहब्बत तू लबों पर
मोहब्बत लफ्ज़ से नफ़रत है मुझ को

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ज़बाँ पे सबके है लफ्ज़-ए-मोहब्बत
निभाने वाला पर कोई नहीं है

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इक लफ़्ज़-ए-मोहब्बत का अदना ये फ़साना है
सिमटे तो दिल-ए-आशिक़ फैले तो ज़माना है

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'लफ़्ज़-ए-मोहब्बत' अपने आप में प्रेम की कोमल और गहरी प्रकृति को समेटे हुए है। यह शब्द भावनाओं का वह पात्र है जो केवल शब्दों से परे जाकर स्नेह की गहराई और गर्माहट को समेटता है। कविता में, यह उन अनकहे बंधनों और मौन वादों का प्रतीक बन जाता है जो प्रेम के साथ आते हैं।

'लफ़्ज़-ए-मोहब्बत' का उपयोग कवि अक्सर प्रेम की पवित्रता और ईमानदारी को उजागर करने के लिए करते हैं। यह बोले गए शब्दों और गहरे, अक्सर अनकहे, भावनाओं के बीच के अंतर को उजागर करता है। यह शब्द हृदय और संसार के बीच एक पुल का काम करता है, प्रेम के मौन संवादों के सार को पकड़ता है।

कविता के क्षेत्र में, 'लफ़्ज़-ए-मोहब्बत' प्रेम की स्थायी शक्ति का प्रमाण है। यह याद दिलाता है कि सच्चा स्नेह अक्सर अनकहे में होता है।