आज लफ़्ज़-ए-मोहब्बत फ़साना हुआतुझ को देखे भी अब तो ज़माना हुआहम को सहरा-नवर्दी मिली इश्क़ मेंअहले दिल का कोई कब ठिकाना हुआ— Navneet krishna