Meaning of

लरज

larj • لرز

काँपना; थरथराना

tremble; shiver

کانپنا; تھرتھرانا

Persian

दुआ को हाथ उठाते हुए लरज़ता हूँ कभी दुआ नहीं माँगी थी माँ के होते हुए — Iftikhar Arif
मेरी ख़ामोशियों में लर्ज़ां है मेरे नालों की गुम-शुदा आवाज़ — Faiz Ahmad Faiz
मेरा उस को जब चूमने का हुआ मन वो लरजा के बोली इजाज़त मुझे है — Prashant Sitapuri
लरज रही हैं गुलिस्ताँ में पत्तियाँ गुल की ये लग रहा है कोई हादसा नया होगा — Shajar Abbas
सफ़र के वक़्त वो मुझ को सवार करते हुए लरज़ते होंठों से बोली 'शजर' ख़ुदा हाफ़िज़ — Shajar Abbas
इन लरज़ते लबों से क्यूँँ तू ने सुर्ख़ आँखों को फिर छुआ ही नहीं — Amaan Pathan
पैरों में लर्जिश हार का संदेशा है हिम्मत सफ़लता की अकेली साथी है — Shubham Rai 'shubh'
पता मुझ को तेरा ये दिल मुझी से इश्क़ को लरज़े करूँँ मैं क्या लगी है भीड़ लैलाओं की पहले से — arjun chamoli
याँ जब भी गुलाबों को मैं हाथ लगाता हूँ क्या जान मिरी वाँ तेरे होंठ लरज़ते हैं — Prashant Sitapuri

'लरज' शब्द उस नाज़ुक एहसास को व्यक्त करता है जो डर या ठंड से जुड़ा होता है। कविता में, यह उन क्षणों की नाज़ुकता और अस्थिरता को पकड़ता है जब दिल या आत्मा गहरी भावनाओं से प्रभावित होती है।

'लरज' का उपयोग कवि पत्तों की हवा में काँपने, प्रेमी के दिल की थरथराहट, या अशांत आत्मा की नाज़ुक स्थिति को दर्शाने के लिए करते हैं।

अपने काँपने में, 'लरज' ताकत और नाज़ुकता के बीच की मौन बातचीत को प्रकट करता है।