Meaning of

विर्द

vird • ورد

जप; पुनरावृत्ति

recitation; repetition

ورد; تکرار

Arabic

उठते नहीं हैं अब तो दुआ के लिए भी हाथ किस दर्जा ना-उमीद हैं परवरदिगार से — Akhtar Shirani
क़दर कर लो ज़रा वरना तरस जाओगे मिलने को जब आएगी ख़बर तुम तक कि अब तो मर गया 'वर्धन' — Harshwardhan Aurangabadi
परवरदिगार आप के सब फैसले अजीब हैं जो तंग था वो तंग है जो ठीक था वो मर गया — Adnan Raza
मैं सब कुछ जानता हूँ आप के बारे में बर-ख़ुर्दार बहुत डर जाते हैं वो जब भी मैं ये बात कहता हूँ — Jagat Singh
इक फ़ुर्सत-ए-गुनाह मिली वो भी चार दिन देखे हैं हम ने हौसले परवरदिगार के — Faiz Ahmad Faiz
मेरे इस जन्म-दिन पर मौत भी हैरान है यारों न जाने कब तलक ज़िंदा रहेगा दर्द में वर्धन — Harshwardhan Aurangabadi
किसी की शक़्ल में पत्थर तराश लेने से ऐ अहमखों कहाँ परवरदिगार बनता है — Amaan Haider

'विर्द' शब्द मूल रूप से शब्दों या वाक्यांशों को दोहराने की क्रिया को दर्शाता है, अक्सर एक आध्यात्मिक या ध्यानात्मक संदर्भ में। कविता में, यह एक लयबद्ध, लगभग सम्मोहक गुण का सुझाव देता है, जहां पुनरावृत्ति भावनात्मक गूंज को गहरा करने का साधन बन जाती है।

कवि 'विर्द' का उपयोग मंत्र-जैसी पुनरावृत्ति के विचार को व्यक्त करने के लिए करते हैं, चाहे वह प्रेम में हो, लालसा में, या आध्यात्मिक भक्ति में। यह विचारों या भावनाओं के अंतहीन चक्र को प्रकट कर सकता है।

काव्यिक क्षेत्र में, 'विर्द' निरंतरता और भक्ति का प्रतीक बन जाता है। यह जीवन की लय के सामने दृढ़ता के सार को पकड़ता है।