
बस तेरे नाम का करता हूँ मैं कसरत से व्रिद
सिवा नुक़सान के इस अम्ल में क्या रक्खा है
बिन पिए रहते हैं मदहोशी के आलम में हम
वाक़ई दोस्त मुहब्बत में मज़ा रक्खा है
— Amaan mirza
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