Meaning of

शब-ए-हिज्र

shab-e-hijr • شب ہجر

विरह की रात; तड़प की रात

night of separation; night of longing

جدائی کی رات; تڑپ کی رات

Persian

शब-ए-हिज्रां बुझा बैठी हूँ मैं सारे सितारे पर कोई फ़ानूस रौशन है ख़मोशी से मेरे अंदर — Kiran K
ये शब-ए-हिज्राँ है तो आप पे वाजिब है शजर हिज्र-ए-महबूब में गिर्या करो सीना पीटो — Shajar Abbas
ये सानिहा भी शब-ए-हिज्र आ पड़ा हम पर तेरा ख़याल तो आया तेरी तलब न हुई — Subhan Asad
शब-ए-हिज्राँ में सुनता था, सलीब-ए-वक़्त की सिसकी ये कुछ पागल समझते हैं घड़ी आवाज़ करती है — "Nadeem khan' Kaavish"
ईद से चंद दिनों पहले ही बिछड़े थे हम यूँँ शब-ए-कद्र शब-ए-हिज्र सी गुज़री मुझ पर — Faiz Ahmad
कुछ तो मुश्ताक़ शब-ए-हिज्र में राहत होगी जाते-जाते कोई तस्वीर पुरानी दे दे — Saqlain Mushtaque

यह शब्द उस गहरी भावनात्मक उथल-पुथल और तड़प को व्यक्त करता है जो प्रिय से दूर बिताई गई रात के दौरान महसूस होती है। कविता में, यह विरह और समय के उस प्रवाह को पकड़ता है जो प्रेम की अनुपस्थिति में अनंत लगता है।

कवि अक्सर इस वाक्यांश का उपयोग विरह और तड़प के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह भावनात्मक दूरी के लिए एक रूपक के रूप में कार्य करता है। रात अनुपस्थिति के दर्द को व्यक्त करने के लिए एक कैनवास बन जाती है।

शब-ए-हिज्र दिल की मौन पुकारों को पकड़ता है। यह प्रेम की अनुपस्थिति की एक शाश्वत अभिव्यक्ति है।