शब-ए-हिज्र तेरी है क्या शर्त अब जोमेरी जाँ है अटकी फ़ुग़ाँ बे-असर हैये आँधी है लाई उसी ने कि 'हैदर'मेरा पेट ख़ाली भरा उस का घर है— Umrez Ali Haider