Meaning of

शाहिद

shaahid • شاہد

गवाह; सबूत; सुंदरता

witness; evidence; beauty

گواہ; ثبوت; حسن

Arabic

इतना मसरूफ़ हूँ जीने की हवस में 'शाहिद' साँस लेने की भी फ़ुर्सत नहीं होती मुझ को — Shahid Zaki
तुम्हारे इश्क़ में कुछ तो कमी हुई होगी मोहब्बतों का शरारा तभी तो मद्धम है — Aasif Buldhanvi
हज़ारों आंधियाँ तूफ़ान आए और गए यारो चराग़-ए-रेख़्ता मद्धम सही पर अब भी जलता है — Rekhta Pataulvi
वो लड़की है शातिर दुनियादारी में इश्क़ मुहब्बत में पर थोड़ी मद्धम है — Shan Sharma
उस की आँखों में काजल कम है तो कोई बात नहीं चाँद अगर थोड़ा मद्धम है आज तो कोई बात नहीं — Meem Alif Shaz
मद्धम मद्धम लहरे हैं ठहरा ठहरा साहिल है उड़ती उड़ती यादें हैं सहमा सहमा सा दिल है — Raj Tiwari
मुन्सिफ़ से अपने हक़ में क्या बोले ना-तवाँ फिर जब एक हो गए हों दोनों तरफ़ के शाहिद — Sohil Barelvi
शब-ए-महताब ये क्या माजरा है रुख़-ए-महताब मद्धम हो रहा है — Shajar Abbas

अपने मूल अर्थ में, 'शाहिद' एक गवाह या साक्षी को संदर्भित करता है। कविता में, यह अवधारणा सुंदरता को स्वयं दिव्यता या उत्कृष्टता की गवाही के रूप में विस्तारित करती है। यह शब्द उपस्थिति का भाव रखता है, एक अटल सत्य जो हमारे सामने खड़ा होता है।

'शाहिद' का उपयोग कवि अक्सर सुंदरता को गहरे सत्य की मौन गवाह के रूप में करने के लिए करते हैं। यह एक प्रिय का वर्णन कर सकता है जिसकी मात्र उपस्थिति कवि की भावनाओं की गवाही देती है। यह शब्द देखे गए और अनदेखे, ज्ञात और अज्ञात के बीच भी अंतर कर सकता है।

कविता में, 'शाहिद' ठोस और अलौकिक के बीच एक पुल बन जाता है। यह वास्तव में देखे गए पर चिंतन का आमंत्रण देता है।