Meaning of

शा़न

shaan • شان

गरिमा; भव्यता; महिमा

dignity; grandeur; majesty

شان; عظمت; جلال

Arabic

ज़िंदगी भर के लिए दिल पे निशानी पड़ जाए बात ऐसी न लिखो, लिख के मिटानी पड़ जाए — Aadil Rasheed
रखते हैं मोबाइल में मोहब्बत की निशानी अब फूल किताबों में छुपाया नहीं करते — Meharban Amrohvi
मैं जब मर जाऊँ तो मेरी अलग पहचान लिख देना लहू से मेरी पेशानी पे हिंदुस्तान लिख देना — Rahat Indori
नज़र आए न तू जिन को परेशानी से मरते हैं जो तुझ को देख लेते हैं वो हैरानी से मरते हैं — Varun Anand
परेशाँ है वो झूटा इश्क़ कर के वफ़ा करने की नौबत आ गई है — Fahmi Badayuni
नींद उस की है दिमाग़ उस का है रातें उस की हैं तेरी ज़ुल्फ़ें जिस के बाज़ू पर परेशाँ हो गईं — Mirza Ghalib
वो शांत बैठा है कब से मैं शोर क्यूँ न करूँ बस एक बार वो कह दे कि चुप तो चूँ न करूँ — Charagh Sharma

'शा़न' शब्द गरिमा और भव्यता की भावना को समेटे हुए है। कविता में, यह प्रकृति की भव्य आभा, आत्मा की महानता, और मौन शक्ति को उजागर करता है जो सम्मान का आदेश देती है।

कवि अक्सर 'शा़न' का उपयोग परिदृश्यों की शाही सुंदरता या किसी चरित्र की आंतरिक महिमा को चित्रित करने के लिए करते हैं। यह विनम्रता के विपरीत है, गर्व और अनुग्रह के बीच संतुलन को उजागर करता है।

काव्यिक क्षेत्र में, 'शा़न' महान और भव्य का उत्सव है। यह हमें गरिमा की मौन शक्ति की याद दिलाता है।